जनमेसँ टुग्गर सिनेहक सुख लेल तरसैत रहलौं
भेटल किरण एक आसक तकरो तँ मिझबैत रहलौं
दुख एहिकेँ केखनो नै की प्रेम किछु नै पएलौं
तकलीफ की एहि दुनिआमे चुप्प जीबैत रहलौं
चमकैत सभ बस्तुकेँ हम अनजानमे सोन बुझलौं
सोना जखन हम पएलौं नै बुझि कऽ हरबैत रहलौं
किछु नै बचल आब अपनेकेँ लूटबअमे लागि गेलौं
ताड़ी कटीयाक मेलामे होस हारैत रहलौं
आँखिक बिसरि आस गेलौं अनुराग सभटा बिसरलौं
गेलौं हराएब दुख ‘मनु’ छन सुखक बिसरैत रहलौं
(बहरे मुजस्सम वा मुजास, मात्राक्रम 2212-2122/ 2212-2122)✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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