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मंगलवार, 30 जून 2026

पोथी चर्चा , हाइकू संग्रह - आखर आँखि



पोथीक नाम : आखर आँखि

विधा : हाइकू संग्रह

भाषा : मैथिली 

कविलेखक जगदानन्द झा ‘मनु

पोथी परिचय: आखर माने अक्षर आँखि मनुष्यक शरीर केर छोट अंग भेला बादो अत्यंत महत्वपूर्ण अछि। आँखि चुपचाप मौन रहितो दुनियाँक नीक बेजए, अन्हार ईजोत, सुख दुख सौंदर्य विरूपता सभ किछु देखैत मनुष्यक चेतनाकेँ निरन्तर सचेत करैत रहैत अछि। तेनाहितेआखर आँखिमे परोसल गेल हाइकू अपन आकारमे भलेँ छोट हुए आँखि जेकाँ अपना भीतर बहुत किछु समेटने अछि। छोट-छोट पाँति पाठकक चेतनाकेँ स्पर्श करबाक सामर्थ रखैत अछि।

आखर आँखिमात्र हाइकू संग्रह नहि भऽ कऽ जीवनक छोट-छोट छनकेँ देखबाक ओकरा आखरमे बाँधबाक एकटा साधना अछि। कतेको बेर बहुत कहला बादो गप्प अपूर्ण रहि जाइत अछि ओतै कतेको बेर बहुत कम शब्द हियाकेँ स्पर्श कऽ लय अछि, एहि संग्रहक प्रत्येक हाइकू ओही सूक्ष्म अनुभूतिक खोज अछि।

 

मूल्य : 299 भा ₹ (संपूर्ण भारतमे डाक खर्च सहित, भारतसँ बाहर डाक खर्च अतिरिक्त)

पोथी प्राप्ति लेल अपन पूर्ण पतामोबाइल न०, पिन कोड सहित 91 9212-46-1006 पर वाट्सअप करी।

 


सोमवार, 29 जून 2026

गजल

प्रेममे सदिखन किए हमहीं हारलौं

भागमे सभटा लिखल तोरा बारलौं

 

चैन मोनक आब भेटत कोना कतय

मोनमे खा चोट चित अप्पन मारलौं

 

राति-दिन आँखिसँ बहै नेहक जल सतत

आगिमे तोहर विरहकेँ घी ढारलौं

 

आब दुनियामे रहब नहि तोरा बिना

देख ली हम एक छन तेँ यम टारलौं

 

मनुजियाबै लेल तोहर हिय प्रेमकेँ

खून देहक हम अपन सभटा गारलौं

 

(बहरे जदीद, मात्राक्रम : 2122-2122-2212)

✍🏻 जगदानन्द झामनु


मंगलवार, 23 जून 2026

गजल

ई जँ अंतिम  राति भेलै तँ की करबै

काल्हि नै नव भोर एलै तँ की करबै

 

आइ छी हमरासँ  रूसल अहाँ बहुते

काल्हि हम्मर प्राण गेलै तँ की करबै

 

ताकि रहलहुँ बाट भरि युग अहाँकेँ हम

नेह आँखिसँ बहि क  हेलै तँ की करबै

 

हँसि क सहि लेलहुँ जमानाक सभ पीड़ा

छलसँ अपने पाछु ठेलै तँ की करबै

 

छोड़ि दुनिया  जा रहल छी भरोसेपर

भाग्य एना ‘मनु’ जँ खेलै तँ की करबै

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


शुक्रवार, 19 जून 2026

गजल

हृदय कोरि कय ओ हँसै छथि

हमर मोनमे  जे बसै छथि


करेजाक बनि दर्द सदिखन

नयन नीर बनिकय खसै छथि

 

बहुत छल मनेबाक कोसिस

मुदा ओ  कपारे  रुसै छथि

 

बना कय अपन ओ बिसरने

अखन आब अम्बर धसै छथि

 

बनेबाक छल चाह जिनका

अपन बनि क ‘मनु’ ओ डसै छथि

 

(बहरे मुतकारिब, मात्राक्रम : 122-122-122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


रविवार, 14 जून 2026

गजल

चलू प्रेमक नगर सजनी बसाबै छी

दुनू प्रीतक डगर मिलि कय सजाबै छी

 

रहे दुनियाक डर ई आब कनिको नहि

हियामे दीप नेहक ओ जगाबै छी

 

जखन कखनो गबै छै कोइली वनमे

मधुर बंसी अहीं संगे  बजाबै छी

 

अलग कखनो कियो नहि कय सकत हमरा

करेजा खोलि सप्पत खा बताबै छी

 

मधुर गाइब गजल सुरमे हिया बोड़ल

सिनेहक छांवमे ‘मनु’केँ सुनाबै छी

 

(बहरे हजजमात्राक्रम : 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


बुधवार, 10 जून 2026

गजल

सभसँ  बड़का गजलगोहि वर भेटलै

राति दिन ओ चलाबैत हर भेटलै

 

सोचि गेलहुँ भरोसा जकर कय क हम
गाममे नहि कतौ ओ तँ घर भेटलै  


सत्य बजबाक साहस किए नहि कतौ

हाकिमक आँखिमे आइ डर भेटलै

 

जीत लेलक सभक मोन ओ गाममे

देख ओकर हृदय भक्त बड़ भेटलै

 

‘मनु’ निभेनाइ नेहक कठिन अछि बुझल

काँट रोपल अपन पैर तर भेटलै

 

(बहरे मुतदारिक, मात्राक्रम : 212-212-212-212

✍🏻 जगदानन्द झामनु


सोमवार, 8 जून 2026

गजल

छूलक जे मोनसँ ओ आखर कहि दिअ

आँखिसँ जे पीलौं ओ सागर कहि दिअ

 

निर्मोही दुनियामे  सभ मतलबकेँ

धोखा जे देलक ओ पाथर कहि दिअ

 

मोनक कोठीमे छी जे दुख रखने

आजुक दिन ओ सभकेँ सादर कहि दिअ

 

नेहक रस छलकैए आँखिक रस्ता

प्रेमसँ भरि ओ सुंदर गागर कहि दिअ


प्रेमक आगिसँ  जीया धड़कय  लागल

कोमल मोनक ‘मनु’ ओ कातर कहि दिअ 

 

(बहरे मीर, मात्राक्रम : 22-22-22-22-22)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’