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बुधवार, 13 मई 2026

गजल

ठठड़ी बना कयलनि ओ तँ सराध हमर

जिनकासँ छल मोनक नेह अगाध हमर

 

मुनि आँखि कयलहुँ विश्वास हियासँ जकर

ओ आबि कयलनि संसार विषाध हमर

 

ओ भोंकलनि मौका देखि पिजेल छुरी

कहियो छली जे तन-मनसँ अराध हमर

 

किछु छोड़लनि नहि जीबाक भरोस कनी

संगे घड़ारी लिख लेलनि बाध हमर

 

अपने जकाँ बुझलहुँ नीक करेज सभक

‘मनु’ बस इहे जीबनमे अपराध हमर

 

(मात्राक्रम 2212-2221-121 12 सभ पाँतिमे) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


शनिवार, 9 मई 2026

रुबाइ

पपनी मोरै नहि आँखि यादे अहाँक

जीवन बहुते अन्हार बादे अहाँक

दिन राति चलैत अछि हमर करेजामे

छवि एककेँ बाद एक मादे अहाँक 

              ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

बुधवार, 6 मई 2026

रुबाइ

तोहर प्रेममे पड़ि पीबैत छी हम तँ 

जुनि कनिको बुझै जीबैत छी हम तँ 

ताड़ीमे डूबि भोरेसँ साँझ धरि ‘मनु’

फाटल करेज अपन सीबैत छी हम तँ 

             ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

गजल

हुनकर प्रेमक धाहसँ हम गुलाबी गेलौं

बुझलनि नहि हमरा हम शराबी गेलौं 

 

हँसि कय हम लूटेलौं मोन सगरो अपन बुझि

भेटल नहि कनिको मोजर हिसाबी गेलौं 

 

सुनलौं बहुते एखन धरि सभक चुप सबटा 

सुनिते देरी मोनक हम जवाबी गेलौं 

 

जीवन भरि नेना पोसब रहल आस  अनके 

चाकर बनिते सरकारी नवाबी गेलौं

 

जगमे बहुते धोखा पाबि  सिखलौं रहब हम

असगर ‘मनु’ आखर संगे किताबी गेलौं

 

(मात्राक्रम 2222-222-122-122 सभ पाँतिमे) 

✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’


बुधवार, 29 अप्रैल 2026

गजल

नहि सिनेहक मोल मिसियो बुझलक हमर

लोक हँसि हँसि कय करेजा तजलक हमर

 

डोर साँसक जेकरा देलौं हाथमे

नहि हिया ओहो तँ संपति तकलक हमर

 

करु भरोसा आब कोना ककरोसँ हम

प्रिय छल जे मोनकेँ बड़ खुनलक हमर

 

मीत छल मोनक सगर जे सुखमे बनल

बुझि घड़ी दुख केर ओ नहि सुनलक हमर

 

देत अनकर दोष नहि ‘मनु’ कनिको हिया

एहने बिधना कपारे लिखलक हमर

 

(बहरे जदीद, मात्राक्रम 2122-2122-2212) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

रुबाइ

छुपि-छुपि  राति दिन हम बाट निहारै छी 

जल्दीसँ आबू बड़ आस  कराबै छी 

पूरा होयत कखन ‘मनु’ मनोकामना

हमरा किए नहि करेजसँ लगाबै छी

                    ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

गजल

अपन एकटा पुरान वार्णिक गजलकेँ, कनीक पॉलिश कय क बहरे हजजमे प्रस्तुत क रहल छी।मतलाक मिसरा-ए-ऊला सभार, ओम प्रकाश जी, लाइव मोशायरा विदेह फेशबूक ग्रूपसँ (03/03/2012)

 

गजल

अहाँ कखनो तँ बाट हमर  घरक धरबै

अहाँ बिन हाथ नहि दोसर वरक धरबै

 

निहारै राति दिन हम बाट खाली छी

अहाँ कखनो कनी कोनो सड़क धरबै

 

सगर सिंगार टुकली नाककेँ नथिया

अहीँ सेनुर पियाजी सिथ परक धरबै

 

मिलनकेँ आसमे साजनसँ हम चललौं

गड़ी घोड़ा ज भेटल नहि टरक धरबै

 

हमर जीवन सगर अछि ई अहीँ वास्ते

अहाँ बिन छोरि जीवन ‘मनु’ नरक धरबै


(बहरे हजज, मात्राक्रम- 1222-1222-1222, मतलाक मिसरा-ए-ऊलामे दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।)

सुझाव, समीक्षा, आदेश सादर आमंत्रित अछि।

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

गजल

प्रियतम अहाँक सुधिमे रहनाइ भेल मुश्किल

जीवैत  हम तँ छी नहि मरनाइ भेल मुश्किल

 

की हाल कहु करेजक टुकड़ी हजार भेलै

सभमे अहीँक छवि अछि गननाइ भेल मुश्किल

 

छी नींद चैन सबपर  कब्जा अपन क लेने

कयलौं पिया कि जादू सुतनाइ भेल मुश्किल

 

बड़ मोनकेँ बुझेलौं ई किछु बुझैत नहि अछि
आइब कनी बुझा दिअ बुझनाइ भेल मुश्किल

 

सदिखन ‘मनु’क हृदय मंदिरमे मुरुत अहीँकेँ

बिन पूजने अहाँकेँ  सहनाइ भेल मुश्किल

 

(मात्राक्रम 2212-122 / 2212-122

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’



सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

गजल

हम अहाँकेँ देखिते सुधि बिसरि गेलौं

लेसने बिन आगि सौंसे पजरि गेलौं 

 

प्राण लेलक आँखि मिलनाइ हरजाइसँ

खा कऽ मोने मोन मुँगबा पसरि गेलौं 

 

अछि जकर मुस्की इजोते सगर चकमक

मोरिते मुँह पानि बिन हम  पिछरि गेलौं 

 

स्वर्ग भेटल अहाँ बिन नरक भेलै 

छोरि सुख बैकुंठकेँ झट ससरि गेलौं

 

देख निरमल नेह हुनकर हृदय गदगद

बुझि सफल ‘मनु’ भेल सपना झहरि गेलौं

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम 2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’