मैथिलीपुत्र ब्लॉग पर अपनेक स्वागत अछि। मैथिलीपुत्र ब्लॉग मैथिली साहित्य आ भाषा लेल समर्पित अछि। अपन कोनो तरहक रचना / सुझाव jagdanandjha@gmail.com पर पठा सकैत छी। कृपया एहि ब्लॉगकेँ subscribe/ फ़ॉलो करब नहि बिसरब, जाहिसँ नव पोस्ट होएबाक जानकारी अपने लोकनिकेँ भेटैत रहत।

बुधवार, 27 मई 2026

गजल

रूसल पियाकेँ मनेबै कोना हम
अपनो हियाकेँ दखेबै कोना हम


नैनासँ धारा कते नोरक बहिरहल

मोनक विरहकेँ नुकेबै कोना हम

 

छी आँखिमे आस बहुते रखने सजल

नेहक डगरकेँ बिछेबै कोना हम

 

प्रेमक सबक बिसरिए गेलाह सभ

विधि प्रेम हुनका सिखेबै कोना हम

 

भोरक किरण बनि अएलहुँ यौमनुहमर

सुख आब नेहक नुकेबै कोना हम

 

(बहरे सगीर मात्राक्रम : 2212-2122-2212)

✍🏻 जगदानन्द झामनु


मंगलवार, 26 मई 2026

गजल

हँसू यौ पिया मोनकेँ नहि दुखाबू

अपन एहि दासीसँ नैना लगाबू

 

अहाँ बिनु विकल भेल छी राति-दिन हम

पिया यौ हमर जियाकेँ जुड़ाबू

 

सजौने कते छी अहाँ प्रीत मोनक

कनी आबि नेहक तँ दरशन कराबू

 

अहाँ बिनु अपन देह बैरी बनल अछि

उठू यौ पिया आब हमरो उठाबू

 

विरहमे मरण सन जीबैतमनुअछि

पियाजी मिलनके गजल नव सुनाबू

 

(बहरे मुतकारिब, मात्राक्रम : 122-122-122-122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


सोमवार, 25 मई 2026

गजल

हँसै छथि हिया छनमे तोरि हम्मर

सिनेहक डोर गेली छोरि हम्मर

 

गेने दूर आँखिसँ की नेह बिसरब

किए गेलखिन मुखड़ा मोरि हम्मर

 

लगा कय आस बैसल छी मोन मारल

कनी नहि सोचलनि जियरा कोरि हम्मर

 

उमड़ि आँखिसँ बसोधारा नोर बहलै

भिजल अछि भाग कोना बोरि हम्मर


सिनेहसँ आब बहुते अछि डरि रहल ‘मनु’

सगर अपने हिया कयलक  चोरि हम्मर


(बहरे करीब, मात्राक्रम: 1222-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


गुरुवार, 21 मई 2026

निर्गुण गजल

ई संसार अछि खाली बसेरा बुझि क आयब भाइ

लेलहुँ जन्म जगमे एक दिन सभ छोरि जायब भाइ

 

साँसक डोर टूटत दूर तखने सभ भ जायत भाइ

माटिक मूरती ई देह सुख कोना क  पायब भाइ


हरिकेँ नाम जगमे जे भजत फल ओ तँ पायत भाइ

धन-बल मोहमे जीवन कते आरो गमायब भाइ

 

जायत संग कृत टा तुच्छ बाँकी सब कहायत भाइ

काल्हिक अछि ककर जगमे भरोसा की बसायब भाइ

 

सत अछि ‘मनु’ कहै जगमे कतय हरि छोरि जायब भाइ

माया सभसँ रहि बड़ दूर  हरि-हरि मनसँ गायब भाइ

(बहरे रूप, मात्राक्रम 2221-2221-2221-2221)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


मंगलवार, 19 मई 2026

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैए

हरिक रूप दुनियाकेँ रिझाबैए

 

मुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहै

हियामे रस सिनेहक जगाबैए

 

जखन बाजै मधुर मुरली मुरारीकेँ

तखन संग राधाकेँ नचाबैए

 

सलोना श्याम हे चितचोर मोहन छी

करेजक चैन गोपिक चुराबैए

 

मनोहर रूपमनु’ देख कान्हाकेँ
चरणमे शीश अप्पन झुकाबैए

(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झामनु


सोमवार, 18 मई 2026

गजल

झुकल तोहर नजरि बिजली खसाबैए

सजल ई तोहर रूप चानोकेँ लजाबैए

 

मधुर मुस्कान तोहर देखि कय सजनी

अपन संसारकेँ साउन बसाबैए

 

जखन आँचर उड़ल तोहर हवामे ई

हिया बेकल कतेकोकेँ कराबैए

 

कनी मुँह देख लै छी जाहि छन तोहर

उमर भरिकेँ दरद सभटा हटाबैए


बिकल ‘मनु’ प्रेममे तोहर बनल पागल

गजलमे प्राण बुझि तोरे सजाबैए

 

(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’