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गुरुवार, 16 जुलाई 2026

गजल

गगन नेहक बना बदरा  मधुर बरखा बहाबै अछि

पिया धरतीक आँचरमे अमृत रस ई चुआबै अछि

 

सजल नैना अहाँकेँ ई धनुष सन देखि कजरायल

हमर ओझल हियामे ओ बिलोका बड़ खसाबै अछि


जखन बाजल झनक पायल झमाझम भय कतहुँ बरसल

हुनक केशक हवा सगरो सुगंधित मन बनाबै अछि

 

मिलन कय आसमे बैसल तकै छी बाट प्रियतमकेँ

उमड़ि कय मेघ जे गरजै हियामे लौ जगाबै अछि

 

उमँग मोनक सगर संगे अपन नेने किए गेलहुँ

हमर ई प्राण ‘मनु’ लेने गजल विरही सुनाबै अछि

 

(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


शनिवार, 11 जुलाई 2026

गजल

जीवन भरि सबहक सुनिते रहलहुँ

मोनक  सभ  पीड़ा पिबिते रहलहुँ

 

गामक घर आँगन खाली कय हम

शहरक धूवाँमे जिबिते रहलहुँ

 

पोखरि भरि बाड़ीसँ मिला लयने

बिन माछक थारी तकिते रहलहुँ

 

सभकेँ सभ किछु नहि भेटल जगमे

भागक लिखलाहा  गणिते रहलहुँ

 

मुँह बोने कौआ सगरो बैसल

चुप भय ‘मनु’ सभटा सहिते रहलहुँ

 

(बहरे मीर, मात्राकर्म : 22-2-22-22-22, तेसर शेरकेँ पहिल पाँतिमे दूटा अलग-अलग लघुकेँ दिर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


गुरुवार, 9 जुलाई 2026

गजल

पैघ नहि  जीवनसँ  दोसर सजा कोनो

नहि कतौ अछि एहि दर्दक दवा कोनो

 

बंद केने  मोनमे छी  दुखक सागर

केकरो लागल भनक नहि हवा कोनो

 

सत्य अंतिम मृत्यु अछि जीवनक सबहक

बेसि एहिसँ आन अछि नहि मजा कोनो

 

बेइमानी आ कपटकेँ जतय घर नहि

अछि अहाँ लग एहि जगमे पता कोनो

 

‘मनु’ हियक भीतर अहंकार जे मारय

नहि कतो एहेन भेटल गदा कोनो

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


रविवार, 5 जुलाई 2026

गजल

हुनक मुस्कीक  जादू जान मारैए

नजरि खसिते हियामे बाण मारैए

 

चमक घोघेसँ रूपक पूर्णिमा लेने

सगर अँगना  कते मुस्कान मारैए

 

उदासी मोनमे  कखनो जँ पसरैए

अहीं लग आबि ई फुलपान मारैए

 

सँभाइर पैर  धरतीपर  कनी राखू

झनक पायलसँ ई सुर तान मारैए

 

‘मनु’क सगरो गजलमे बनि अहीं आखर

कते यौवन  दमकि सोहान मारैए

 

(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


मंगलवार, 30 जून 2026

पोथी चर्चा , हाइकू संग्रह - आखर आँखि



पोथीक नाम : आखर आँखि

विधा : हाइकू संग्रह

भाषा : मैथिली 

कविलेखक जगदानन्द झा ‘मनु

पोथी परिचय: आखर माने अक्षर आँखि मनुष्यक शरीर केर छोट अंग भेला बादो अत्यंत महत्वपूर्ण अछि। आँखि चुपचाप मौन रहितो दुनियाँक नीक बेजए, अन्हार ईजोत, सुख दुख सौंदर्य विरूपता सभ किछु देखैत मनुष्यक चेतनाकेँ निरन्तर सचेत करैत रहैत अछि। तेनाहितेआखर आँखिमे परोसल गेल हाइकू अपन आकारमे भलेँ छोट हुए आँखि जेकाँ अपना भीतर बहुत किछु समेटने अछि। छोट-छोट पाँति पाठकक चेतनाकेँ स्पर्श करबाक सामर्थ रखैत अछि।

आखर आँखिमात्र हाइकू संग्रह नहि भऽ कऽ जीवनक छोट-छोट छनकेँ देखबाक ओकरा आखरमे बाँधबाक एकटा साधना अछि। कतेको बेर बहुत कहला बादो गप्प अपूर्ण रहि जाइत अछि ओतै कतेको बेर बहुत कम शब्द हियाकेँ स्पर्श कऽ लय अछि, एहि संग्रहक प्रत्येक हाइकू ओही सूक्ष्म अनुभूतिक खोज अछि।

 

मूल्य : 299 भा ₹ (संपूर्ण भारतमे डाक खर्च सहित, भारतसँ बाहर डाक खर्च अतिरिक्त)

पोथी प्राप्ति लेल अपन पूर्ण पतामोबाइल न०, पिन कोड सहित 91 9212-46-1006 पर वाट्सअप करी।

 


सोमवार, 29 जून 2026

गजल

प्रेममे सदिखन किए हमहीं हारलौं

भागमे सभटा लिखल तोरा बारलौं

 

चैन मोनक आब भेटत कोना कतय

मोनमे खा चोट चित अप्पन मारलौं

 

राति-दिन आँखिसँ बहै नेहक जल सतत

आगिमे तोहर विरहकेँ घी ढारलौं

 

आब दुनियामे रहब नहि तोरा बिना

देख ली हम एक छन तेँ यम टारलौं

 

मनुजियाबै लेल तोहर हिय प्रेमकेँ

खून देहक हम अपन सभटा गारलौं

 

(बहरे जदीद, मात्राक्रम : 2122-2122-2212)

✍🏻 जगदानन्द झामनु


मंगलवार, 23 जून 2026

गजल

ई जँ अंतिम  राति भेलै तँ की करबै

काल्हि नै नव भोर एलै तँ की करबै

 

आइ छी हमरासँ  रूसल अहाँ बहुते

काल्हि हम्मर प्राण गेलै तँ की करबै

 

ताकि रहलहुँ बाट भरि युग अहाँकेँ हम

नेह आँखिसँ बहि क  हेलै तँ की करबै

 

हँसि क सहि लेलहुँ जमानाक सभ पीड़ा

छलसँ अपने पाछु ठेलै तँ की करबै

 

छोड़ि दुनिया  जा रहल छी भरोसेपर

भाग्य एना ‘मनु’ जँ खेलै तँ की करबै

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’