मैथिली साहित्य आ भाषा लेल समर्पित Maithiliputra - Dedicated to Maithili Literature & Language
सोमवार, 16 मार्च 2026
गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026
गजल
प्रियतम अहाँक सुधिमे रहनाइ भेल मुश्किल
जीवैत हम तँ छी नहि मरनाइ भेल मुश्किल
की हाल कहु करेजक टुकड़ी हजार भेलै
सभमे अहीँक छवि छल गिननाइ भेल मुश्किल
छी नींद चैन सबपर कब्जा अपन क लेने
कयलौं अहाँ कि जादू सुतनाइ भेल मुश्किल
बड़ मोनकेँ बुझेलौं कनिको बुझैत नहि अछि
आइब अहीँ बुझा दिअ बुझनाइ भेल मुश्किल
सदिखन ‘मनु’क हृदय मंदिरमे मुरुत पियाकेँ
बिन पूजने पियाकेँ सहनाइ भेल मुश्किल
(मात्राक्रम 2212-122 / 2212-122)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
सोमवार, 2 फ़रवरी 2026
गजल
हम अहाँकेँ देखिते सुधि बिसरि गेलौं
लेसने बिन आगि सौंसे पजरि गेलौं
प्राण लेलक आँखि मिलनाइ हरजाइसँ
खा कऽ मोने मोन मुँगबा पसरि गेलौं
अछि जकर मुस्की इजोते सगर चकमक
मोरिते मुँह पानि बिन हम पिछरि गेलौं
स्वर्ग भेटल ओ अहाँ बिन नरक भेलै
छोरि सुख बैकुंठकेँ झट ससरि गेलौं
देख निरमल नेह हुनकर हृदय गदगद
बुझि सफल ‘मनु’ भेल सपना झहरि गेलौं
(बहरे कलीब, मात्राक्रम 2122-2122-1222)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
शनिवार, 31 जनवरी 2026
गजल
प्रेम जिनकासँ छल ओ मुँह मोरि लेलनि
नेग दर्दक द झट नाता तोरि लेलनि
ओ हमर दर्दकेँ हँसि खिल्ली उड़ाकय
छोरि आनसँ किए नाता जोरि लेलनि
प्रेम केनाइ की बुझता निर्दयी ओ
जे हृदय केकरो छनमे कोरि लेलनि
सीखता की चलब नेहक फूलपर ओ
संग चलनाइ शूलक जे छोरि लेलनि
‘मनु’ अनाड़ी कपट छलकेँ चिन्हलक नहि
मोन नहि ओ करेजोकेँ झोरि लेलनि
(बहरे असम, मात्राक्रम 2122-1222-2122)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026
गजल
अहाँ मुस्कैत रही हमरा देखैत रही
अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही
रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही
सगर गुणगान अहाँकेँ हम गाबैत रही
मधुरगर बोल अहाँ सदिखन बाजैत रही
अहाँकेँ सुनि क सिनेहे हम ताकैत रही
अहाँ ढारैत रही डुबि हम पीबैत रही
सुनरकी संग हिया रसमे तीतैत रही
अहाँ जीतैत रही ‘मनु’ हम हारैत रही
पिया मनुहार सँ ई जीवन जीबैत रही
(मात्राक्रम 1222-112-2222-112 सभ पाँतिमे)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
शनिवार, 17 जनवरी 2026
गजल
हमरा प्रेम करु सदिखन बसन्ती पिया
नहि बाबूक हम यौ आब रहलहुँ धिया
बहुते जतन सोलह वर्ष सम्हारलहुँ
सहलो जाइए नहि आब टूटे हिया
साजन लेल रखने नेह छी कोंढ़ तर
रुकि नहि करु जुलम तरसै हमर ई जिया
आँकुर मोनमे प्रेमक जखन फूटलै
दुनियामे रहल नै आब कोनो ठिया
गेलै बीत साउन टूटि दम अछि रहल
जल्दी आउ ‘मनु’ जरि गेल आशक दिया
(बहरे कबीर, मात्राक्रम 2221-2221-2212)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
शुक्रवार, 26 सितंबर 2025
गजल
करेजमे बसा हमरो तँ कनी पिआर करु
अपन बना क हमरा प्रिय अहाँ दुलार करु
नुका क छी अहीँकेँ हम रखने हिया त’रे
करब अहाँक पूजा नै सगरो पसार करु
मनक तरंग सबटा छोरि अहीँक छी बनल
विचारु नै इना जल्दीसँ अहाँ कहार करु
सिनेह होइ की छै आबु तँ हम कहैत छी
जिवू खुशीसँ जीवन नै अकरा पहार करू
दुलार नै जतय धन केर बिना कियो करै
सिनेह ओइ ‘मनु’ दुनियासँ किना उधार करु
(मात्राक्रम 12-12-12-221-12-12-12 सभ पाँतिमे)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
सोमवार, 1 सितंबर 2025
गजल
नुका कय मुँह अपन सगरो कनै छी हम
विरहकेँ आगिमे सदिखन जरै छी हम
लगा नेहक किए ई आँच चलि गेलौं
करेजक दर्द सहियो नहि सकै छी हम
लगन एतेक सतबै छै बुझल नहि छल
विछोहे राति दिन घुटि-घुटि मरै छी हम
नजरिमे छी सभक हारल बताहे टा
बुझत की आन आनंदे रहै छी हम
पिया ओता हमर ई सोचि जीबै छी
लगोने आश ‘मनु’ रस्ता तकै छी हम
(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’