“अहाँ कोन काज करै छी?”
“हम लिखैत छी।”
“की लिखैत छी?”
“मैथिली साहित्य, जेना कविता, गजल, कथा आदि।”
“लिखैत छी से बुझलहुँ, मुदा काज की करै छी?
“लिखबे हमर काज अछि।”
“तँ ई लिखलासँ घर चलि जाइए? नहि ने तँ घर चलबै लेल कोन काज करै छी?”
मैथिली साहित्य आ भाषा लेल समर्पित Maithiliputra - Dedicated to Maithili Literature & Language
“अहाँ कोन काज करै छी?”
“हम लिखैत छी।”
“की लिखैत छी?”
“मैथिली साहित्य, जेना कविता, गजल, कथा आदि।”
“लिखैत छी से बुझलहुँ, मुदा काज की करै छी?
“लिखबे हमर काज अछि।”
“तँ ई लिखलासँ घर चलि जाइए? नहि ने तँ घर चलबै लेल कोन काज करै छी?”
“मुझौँसा, टाटीबला, सरधुआ, कीड़ा फरतौ कीड़ा”
“की भेल? यै गायटोलबाली, भोरे-भोर एतेक आमिल किएक पीने छी? आ ई कीड़ा ककरा फरा रहल छी?”
“की कहूँ यौ बौआ, घर-घर शौचालय-योजनाक लेल आइ चारि महीनासँ ई सरधुआ मुखियाक अँगनाक फेरा लगा-लगा कय टाँग टूटि गेल, मुदा आइ बुझयमे आबि गेल जे सरधुआ अंततः हमर पैखाना खाए गेल।”
“काका यौ कोनो विधा लेल प्रोफेसर पैघ कि विधाकार? विधाकार माने जे ओही विधापर काज कएने हुअथि, जिनकर ओही विधाक विकासमे कोनो योगदान होइन। जे बेस मात्रामे नीक-नीक रचना ओही विधामे लिखने हुअथि वा जिनकर ओही विधामे योग्य पोथी प्रकाशित भेल होइन।”
“हमरा हिसाबे तँ विधाकार पैघ होबाक चाही।”
“तहन मंचपर ओही विधाक नाम गूगल करैबला प्रोफेसर मुख्य वक्ता कोना?”