मैथिलीपुत्र ब्लॉग पर अपनेक स्वागत अछि। मैथिलीपुत्र ब्लॉग मैथिली साहित्य आ भाषा लेल समर्पित अछि। अपन कोनो तरहक रचना / सुझाव jagdanandjha@gmail.com पर पठा सकैत छी। कृपया एहि ब्लॉगकेँ subscribe/ फ़ॉलो करब नहि बिसरब, जाहिसँ नव पोस्ट होएबाक जानकारी अपने लोकनिकेँ भेटैत रहत।

भक्ति गजल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
भक्ति गजल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 21 मई 2026

निर्गुण गजल

ई संसार अछि खाली बसेरा बुझि क आयब भाइ

लेलहुँ जन्म जगमे एक दिन सभ छोरि जायब भाइ

 

साँसक डोर टूटत दूर तखने सभ भ जायत भाइ

माटिक मूरती ई देह सुख कोना क  पायब भाइ


हरिकेँ नाम जगमे जे भजत फल ओ तँ पायत भाइ

धन-बल मोहमे जीवन कते आरो गमायब भाइ

 

जायत संग कृत टा तुच्छ बाँकी सभ कहायत भाइ

काल्हिक अछि ककर जगमे भरोसा की बसायब भाइ

 

सत अछि ‘मनु’ कहै जगमे कतय हरि छोरि जायब भाइ

माया सभसँ रहि बड़ दूर  हरि-हरि मनसँ गायब भाइ

(बहरे रूप, मात्राक्रम 2221-2221-2221-2221)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


मंगलवार, 19 मई 2026

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैए

हरिक रूप दुनियाकेँ रिझाबैए

 

मुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहै

हियामे रस सिनेहक जगाबैए

 

जखन बाजै मधुर मुरली मुरारीकेँ

तखन संग राधाकेँ नचाबैए

 

सलोना श्याम हे चितचोर मोहन छी

करेजक चैन गोपिक चुराबैए

 

मनोहर रूपमनु’ देख कान्हाकेँ
चरणमे शीश अप्पन झुकाबैए

(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झामनु


शनिवार, 31 मई 2025

गजल

बड़ सुनल जस  माइ हे तोहर दुअरिया

जोड़ि कल अनलौं  सिनेहक हम गठरिया

 

सूप डाला कोनिया सभमे अरज छै

थाढ़ दुखलै गोरबा   फेरूँ नजरिया

 

दुख दुखीयाकेँ हरै   परमेश्वरी तूँ

माइ हमरे बेरिया मुनलअ किबरिया

 

दिन छये देने छलौं शोभा अपन जे

फेर दर्शन दिअ अहाँ हम छी भिखरिया

 

मोन टूटल जाइए  छल देह टूटल

‘मनु’ तकै छै माइकेँ सगरो नगरिया

 

(बहरे रमल, मात्राक्रम 2122-2122-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

 


शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

भक्ति गजल

आई महाशिवरात्रि केर शुभ अवसर पर श्रीशिव जीकेँ कृपासँ प्रस्तुत अछि एकटा शिव गजल, भक्ति गजल 

गजल 

चलू देखब हे बहीना शिवकेँ 

अपन गौरीकेँ सजनमा शिवकेँ 

 

सभक ई खाली भरै छथि झोली 

सरण आइब जे सुमरला शिवकेँ 

 

गरीबोकेँ छथि इहे सुननाहर 

दियौ जल भरि एक लोटा शिवकेँ 

 

मनुख दानव देव आ प्रेतात्मा 

सगर दुनिया मिल मनेला शिवकेँ 

 

सिया रामोकृष्ण हुनके पुजलनि 

बनेलनि सगरो अराध्या शिवकेँ 

 

कृपानिधि कैलाशवासी जय भव

चरण वंदन जग रचैता शिवकेँ 

 

मनोरथ सब पूर्ण करता शम्भू 

कहल ‘मनु’ जे मनसँ भजता शिवकेँ 

(मात्राक्रम- 1222-2/ 1222-2)

सुझाव, मार्गदर्शन व आलोचना सादर आमंत्रित अछि। 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

गुरुवार, 5 जनवरी 2023

गजल

भगवती जकर माए  टुगर रहल कोना

हाथ छै दुनू भेटल रंक  कहल कोना

 

माथ पर हमर सदिखन हाथ माय छथि रखने

एहिठाम रहलै कोनो  कठिन टहल कोना 

 

लेब छोरि जीवन देबाक गप्प जे सोचत

संग-संग ओकर सुख शांति नहि बहल कोना

 

शेरकेँ घरे बैसल  नहि शिकार भेटै छै

घरसँ जे निकलबै नहि घर बनत महल कोना

 

काज नहि अपन हिस्सा केर ‘मनु’ करी हम सब

 सहज सगर दुनिया नहि  बनत जहल कोना


(मात्राक्रम 212-1222 /212-1222, सभ पाँतिमे)

 ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


 

शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

भक्ति गजल

मैया हमर जगतारनि कल्याणी 

सबहक अहाँ सुधि लेलौं महरानी 


नै हम मिलब माँ बाटक गरदामे

चिंता किए जेकर माय भवानी  


जग ठोकरेलक सदिखन ढेपासन 

देलौं शरण निर्बलके हे दानी


दर्शन अपन दिअ हे अम्बे माता 

नै सोन झूठक चाही नै चानी


धेलक चरण 'मनुतोहर हे मैया 

नै आब जगमे ककरो हम जानी 

(मात्रा क्रम : २२१२-२२२-२२२)

जगदानन्द झा 'मनु'

सोमवार, 15 मई 2017

भक्ति गजल

हम्मर अँगना मैया एली

गमकै चहुदिस अड़हुल बेली

 

धन हम छी धन हम्मर अँगना

मैया जतए दर्शन देली

 

आबू बहिना संगी हम्मर

मैया संगे    सामाँ खेली

 

जे किछु अछि एखन हमरा लऽग

ओ  सबटा  मैया   दय  गेली

 

बड़ भागसँ ‘मनु’ भेटल अवसर

मैया हमरो सेबा लेली

 

(मात्राक्रम, सब पाँतिमे आठ-आठटा दीर्घ) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’