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शनिवार, 31 जनवरी 2026

गजल

प्रेम जिनकासँ छल मुँह मोरि लेलनि  

नेग दर्दक  द झट नाता तोरि लेलनि  


ओ हमर दर्दकेँ हँसि खिल्ली उड़ाकय

छोरि आनसँ किए नाता जोरि लेलनि  

 

प्रेम केनाइ की बुझता निर्दयी ओ

जे हृदय केकरो छनमे कोरि लेलनि

 

सीखता की चलब नेहक फूलपर ओ

संग चलनाइ शूलक जे छोरि लेलनि

 

‘मनु’ अनाड़ी कपट छलकेँ चिन्हलक नहि

मोन नहि ओ करेजोकेँ झोरि  लेलनि

 

(बहरे असम, मात्राक्रम 2122-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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