रूसल पियाकेँ मनेबै कोना क हम
अपनो हियाकेँ दखेबै कोना क हम
नैनासँ धारा कते नोरक बहिरहल
मोनक विरहकेँ नुकेबै कोना क हम
छी आँखिमे आस बहुते रखने सजल
नेहक डगरकेँ बिछेबै कोना क हम
प्रेमक सबक ओ बिसरिए गेलाह सभ
विधि प्रेम हुनका सिखेबै कोना क हम
भोरक किरण बनि अएलहुँ यौ ‘मनु’ हमर
सुख आब नेहक नुकेबै कोना क हम
(बहरे सगीर मात्राक्रम : 2212-2122-2212)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें