हँसू यौ पिया मोनकेँ नहि दुखाबू
अपन एहि दासीसँ नैना लगाबू
अहाँ बिनु विकल भेल छी राति-दिन हम
पिया यौ हमर ई जियाकेँ जुड़ाबू
सजौने कते छी अहाँ प्रीत मोनक
कनी आबि नेहक तँ दरशन कराबू
अहाँ बिनु अपन देह बैरी बनल अछि
उठू यौ पिया आब हमरो उठाबू
विरहमे मरण सन भ जीबैत ‘मनु’ अछि
पियाजी मिलनके गजल नव सुनाबू
(बहरे मुतकारिब, मात्राक्रम : 122-122-122-122)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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