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रविवार, 14 जून 2026

गजल

चलू प्रेमक नगर सजनी बसाबै छी

दुनू प्रीतक डगर मिलि कय सजाबै छी

 

रहे दुनियाक डर ई आब कनिको नहि

हियामे दीप नेहक ओ जगाबै छी

 

जखन कखनो गबै छै कोइली वनमे

मधुर बंसी अहीं संगे  बजाबै छी

 

अलग कखनो कियो नहि कय सकत हमरा

करेजा खोलि सप्पत खा बताबै छी

 

मधुर गाइब गजल सुरमे हिया बोड़ल

सिनेहक छांवमे ‘मनु’केँ सुनाबै छी

 

(बहरे हजजमात्राक्रम : 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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