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शुक्रवार, 19 जून 2026

गजल

हृदय कोरि कय ओ हँसै छथि

हमर मोनमे  जे बसै छथि

 

करेजाक बनि दर्द सदिखन

नयन नीर बनिकय खसै छथि

 

मनेबाक कोसिस बहुत छल

मुदा ओ  कपारे  रुसै छथि

 

बना कय अपन ओ बिसरने

अखन आब अम्बर धसै छथि

 

बनेबाक छल चाह जिनका

मुदा ओ तँ छुपि ‘मनु’ डसै छथि

 

(बहरे मुतकारिब, मात्राक्रम : 122-122-122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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