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शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

गजल

रूसि असगर किए चललौं दिल लगा लिअ

आउ चलि संग हमरो अप्पन बना लिअ

 

नहि बचन देब हम नहि किछु मोल एकर

संग हमरा ल  मोनक संसय हटा लिअ

 

छोड़ि सगरो शिकाइत संगे चलब हम

प्राण छी हम अहाँकेँ हमरो मना लिअ

 

बारि दुनिया अहीँपर छोड़लौं सबकिछु

जीव कोना अहाँ बिन चितमे बसा लिअ

 

जुनि बुझू आन जगमे   सपनोसँ  कखनो

मीत बुझि ‘मनु’ करेजसँ आबो सटा लिअ


(बहरे असममात्राक्रम  : 2122-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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