पहड़ राति बीत गेल नहि निन्द आबैए हमरा
बितल छन अहाँक संग रहि-रहि सताबैए हमरा
हृदय मोहनी अहाँक छवि आँखिमे जे रखने छी
ल कय आब ई तँ जान मानत बुझाबैए हमरा
इशारासँ राति दिन हियामे बजाबै छी छन छन
मुनल आँखि कोन बीध खोलब रिझाबैए हमरा
अहाँ हँसि अतेक जुनि खसाबू बिजुड़िया ई दाँतक
सहब आब अस्मभव भितर धरि हराबैए हमरा
मधुर भेट केर आब अवसर कखन कोना होयत
विचारेसँ बड्ड ‘मनु’ करेजा जुड़ाबैए हमरा
(मात्राक्रम- 12-21-21-2122-1222-22, सभ पाँतिमे)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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