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गुरुवार, 17 अक्टूबर 2013

गजल

कोना अहाँकेँ घुरि कहब आबै लेल

बड़ दूर गेलौं  टाका कमाबै लेल

 

नै रीत कनिको प्रीतक बुझल पहिनेसँ

टूटल करेजा अछि किछु सुनाबै लेल

 

ठोकर कपारक लागल जखन सबतरिसँ

नहि नोर आँखिक बचलै नुकाबै लेल

 

सदिखन अहाँ बैसल मोनमे बनि मीत

की  दूर गेलौं  हमरे कनाबै लेल

 

कोना ‘मनु’ कहतै आब अप्पन दोख

घुरि आउ फेरसँ  दुनियाँ  बसाबै लेल

 

(बहरे सलीममात्रा क्रम  2212-2221-2221)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मन’


शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

अनमोल झा जीक पोथी “टेकनोलजी”क समीक्षा


समीक्षक – जगदानन्द झा मनु’
मिथिला संस्कृतिक परिषद, कोलकत्ता द्वारा प्रकाशित श्री अनमोल झा जीक लघुकथा संग्रह टेकनोलजी एखन हमरा हाथेमे अछि। पाँछाक तीन दिनसँ लगातार एकरा पढ़ि रहल छी। सुन्नर कवर पेंजसँ सजल तेहने भीतरक कथा सभ एकसँ एक उपरा उपरी।
सबसँ पहिने अनमोल जीकेँ एहि --- कथा संग्रह हेतु बहुत बहुत बधाइ आ संगे संग मंगल कामना जे मैथिली साहित्यमे दिनो दिन ओ शुक्ल पक्षक चाँन जकाँ उदयमान होइत रहथि।
मिथिलांचल टुडे टीमक तरफसँ हमरा एहि पोथीक समीक्षा केर दायित्व भेटल। हमरा लेल ई कठिन काज आ ओहूसँ बेसी कष्टकर छल बिना कोनो पक्ष बिपक्षमे गेने तटस्थ एहि पुस्तककेँ समीक्षा केनाइ। हमरामे कौशल आ शहास दुनूक अभाब मुदा माँ सरोस्वती आ गुरुदेवकेँ सुमिरैत अपन आँखिकेँ पोथीक पन्नापर आ कलमकेँ कागदपर चलबए लगलहुँ।
अनमोल जीक समर्पण देख मोन गदगद भए गेल। जतए आजुक नव पीढ़ी अपन माए बाबूकेँ बोझ बुझि रहल अछि ओहिठाम अनमोल जीक

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

मैयाक गीत


मैया भवानी  अलख जगेथीन
अन्न धन देथीन हमरो घर ना
नै हम रहबै लेने खाली दूबि धान

माँगै छी मैयासँ माँगक सेनूर
लाले लाल अचरीक दान
मैया करथीन हमरो कल्याण

सोन सन ललना हमरो कोरामे
देथीन मैया एक दिन ना
एबै हम संगे संग
करै लेल एहिठाम चूमान

जोगनी बनि सेबलहुँ हम
मैयाकेँ एखन धरि
वन वनसँ अनलहुँ फूल पान

मैया कनी दियौ हमरोपर धियान  

*****
जगदानन्द झा 'मनु'

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

बीमारी

बीमारी छल त पुरान मुदा आब जवान भ गेल
जाहि सॅ सब कियो व्यक्ति आब परेषान भ गेल

एहि सॅ बचे के नहिं छे कोनो उपाय
बाजारो में भेटहि नहिं छे कोनो दवाई

कि एहि जगमे फेर नारीके सम्मान हेते ?

नहिं जानि  कहिया धरि एना अपमान हेते
कि एहि जगमे फेर नारीके सम्मान हेते
होइत अछि पूजा लक्ष्मी आ दुर्गाके जाहि ठाम
जुल्म होइत देखलौं हम , नारीपर ओहि ठाम
कि एहि

गीत - सब दिलके पाँछा लागल रहति अछि

दिल अभागल रहति अछि , दिल पागल रहति अछि
किएक सब दिलके पाँछा लागल रहति अछि
दिल दिल होयत अछि , मासूम दिल होयति अछि
तहियो सब दिलके पाँछा लागल रहति अछि
गलती एकर एतबी दिल , दिलसॅ प्यार कएलक

गीत - अहाँक रुप चाँद सन अछि

सभ कहैत अछि अहाँक रुप चाँद सन अछि , हमरासॅ पूछू चंदा अहाँ सन अछि
सभ कहैत अछि बोली कोईली सन अछि ,नहिं कोईलीके बोली अहाँ सन अछि

फूलके महक सभसॅ नीक होयति अछि ,ओ खूशबू कहँा जे अहाँ बदनमे अछि
कथी सॅ तुलना करी अहाँ के फॅुराय नहिं अछि ,

चहटगर गीत


पोर पोर तोहर रस सॅ भरल
यौवन भेलो निखार
सोलह बरस के उमर में सभ
मांगहि छौ प्यार
अपन सजना बना ले गे हे गे गोरकी छउड़ी -2

गीत

शेर - हमरा सॅ जुनि पुछू कतेक प्रेम अछि अहाँ से 
पूछबाक अछि त दिल सॅ पूछू कतेक प्रेम अछि अहाँ से 

गीत
आबू लग त आउ हमर बात सूनू
किछु हम कही किछु अहूँ कहू
हमर मन बेचैन अछि सजनी अहाँ के लेल -2
पहिल बेर जखन हम देखलौं अहाँ के

गीत

माय बाप के सतबियँ जुनि बौआ -2
हमर बात ध्यान सॅ सुन बौआ 
माय बाप के सतबियँ जुनि बौआ
माय छथि जग में देवी , पिता छथि भगवान रौ

जखन ओ मन पड़य छथि

हँसेति छी जेखन ओ मन पड़य छथि 
कानैति छी जेखन ओ मन पड़य छथि

बितलाहा दिन आबि जायक्मअ अछि सोझा 
बहुत ओ जेखन मन पड़य छथि

गीत

गे पसिनियॉ भौजी पिया दे कनीक ताड़ी गे — 4
एक लबनी ताड़ीकेँ  खातिर, किए  करे छें एना गे
तोहर हम परमामेन्ट ग्राहक , किए  करे छें एना गे — 2
काल्हि हम पाइ देबे करबो — 2 आई पिया दे उधारी गे
गे पसिनियॉ भौजी पिया दे कनीक ताड़ी गे —2
बिन ताड़ीकेँ  कोना हम जीयब , ताड़ी हमर जीवन छी
मानय हमर बात गे भौजी , ताड़ी हमर जीवन छी — 2
ताड़ी जौं नहिं पियैम आई त —2 भ जएतो मारामारी गे
गे पसिनियॉ भौजी पिया दे कनी के ताड़ी गे —2
गाछ बला जौं ताड़ी नहिं छउ , आखिसॅ पिया दे गे
पियासल हम छी जनम जनम के , आखिसॅ पिया दे गे
मिसिया भरि मुस्कान पर आशिक — 2 लिख देतौ घड़ारी गे
गे पसिनियॉ भौजी पिया दे कनी के ताड़ी गे — 4

नोट — हमर उद्धेश्य सिर्फ मनोरंजन अछि , कियो गोटे व्यक्तिगत नहिं लेति जौं किनको एतराज छन्हि त आदेश करी ई पोस्ट हटा देलि जायत । धन्यवाद

आशिक ' राज'

शनिवार, 21 सितंबर 2013

माए


कोना कए बिसरबै माए
अहाँक सिनेह ओ
आँचर तर अहाँक बसलहुँ
पिलहुँ ममताक नीर ओ

हम सुती सुखलमे
आ अहाँ तीतलमे
अपने भूखे सुति कए माए
पोसलहुँ हमरा घीमे

रौद पानि अपने सहलहुँ
हमरापर नहि आएल आँच
हम सुती राति राति भरि
अहाँक रहेए निन्न काँच

नव नव कपड़ा पएलहुँ
हम, सब पावनि तिहारमे
एक जोड़ साड़ीमे माए
अहाँक जीवन बीतल बिचारमे

सब शिक्षा सब दीक्षा
अहाँ हाथे अप्पन देलहुँ
सुख छोरि हमरा लेल
दुख सबटा अहाँ लेलहुँ

हे माए आइ धरि  
अहाँक एतेक सिनेह
छोरि अहाँ लग
दोसर कतौ नहि पेलहुँ।                       
   

शनिवार, 14 सितंबर 2013

भगवानकेँ जे नीक लगनि


बाबा भोलेनाथक विशाल मन्दिर। मुख्य शिवलिंग आ समस्त शिव परिवारक भव्य आ सुन्दर मूर्ति। साँझक समय एक-एक कए भक्त सब अबैत आ बाबाक स्तुति वन्दना करैत जाएत। एकटा चारि बर्खक नेना आबि बाबा दिस धियानसँ देखैत। ताबएतमे एकटा भक्त आबि बाबाक सोंझाँ श्लोक, कर्पुर गौरं करुणाव

शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

गजल

हम गजल कोना कहू भीड़मे रसगर
सगर मुँह बेने मनुख भेसमे अजगर

पाइ घोटाला हबालाक खाएकेँ
रोग छै सबकेँ पकरने किए कसगर

बहिन माए भाइ बाबू अपन कनियाँ
सब तकै सम्बन्धमे दाम ली जथगर

गामकेँ बेटा परेलै शहर सबटा
खेत एकोटा रहल आब नै चसगर

छै बिकाइ प्रेम दू-दू टका मोले
रीत मनुकेँ नै लगै छै कनी जसगर

(बहरे कलील, मात्रा क्रम २१२२-२१२२-१२२२)

जगदानन्द झा मनु’