@जगदानन्द झा ‘मनु’
मैथिली साहित्य आ भाषा लेल समर्पित Maithiliputra - Dedicated to Maithili Literature & Language
मंगलवार, 24 दिसंबर 2013
गाम बदलि रहल अछि
@जगदानन्द झा ‘मनु’
रविवार, 22 दिसंबर 2013
गजल
सुलबाइ बाबूक गप्पसँ ससुरक वचन हीत लगलै
अप्पन घरक खेत आँगनमे खटब बुड़िबक सनककेँ
परदेशमे नाक अप्पन रगड़ैत नव रीत लगलै
आदर्श काजक चलब गामे-गाम झंडा लऽ आगू
माँगेत घर भरि तिलक बेटा बेरमे जीत लगलै
प्रेम तँ बदलै सभक बुझि धन बल अमीरी गरीबी
निर्धन अछूते रहल धनिकाहा कते मीत लगलै
माए बहिन केर बोलसँ सभकेँ लगै कानमे झ’र
सरहोजि साइरक गप ‘मनु’केँ मधुरगर गीत लगलै
(बहरे मुजस्सम वा मुजास, मात्रा क्रम – २२१२-२१२२/२२१२-२१२२)
जगदानन्द झा ‘मनु’
गुरुवार, 19 दिसंबर 2013
गजल
प्रेम बिनु केने कि जानब सजा की छै
बसि क’ धारक कात हेलब सिखब कोना
आउ देखी कूदि एकर मजा की छै
नोकरी कय नै कियो धन कमेलक बड़
अपन मालिक बनु तँ एहिसँ भला की छै
आइ अप्पन बलसँ पीएम बनतै ओ
हारि झूठ्ठे ढोल पीटब हबा की छै
रोडपर कोनो करेजक परल टुकड़ा
ओहि छनमे ‘मनु’सँ पुछबै दया की छै
(बहरे कलीब, मात्रा क्रम, २१२२-२१२२-१२२२)
जगदानन्द झा 'मनु'
शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013
गजल
नै मरब पीने बिनु प्रेम चुस्कीटा
जे अहाँ बजलौं करू ओकरो पूरा
की अहूँ भेलौं खली बम्म फुस्कीटा
नै कटाबू नाक आबू सभक सोंझाँ
की तरे-तर रहब मारैत भुस्कीटा
डर लगैए भीड़मे नै निकलु बाहर
देख टीभी बसि घरे करब टुस्कीटा
मनु दखेलौं सभक अपनो कनी देखू
बिसरि अप्पन काज नै बनब घुस्कीटा
(बहरे कलीब, मात्रा क्रम – २१२२-२१२२-१२२२)
सोमवार, 2 दिसंबर 2013

मिथिला लेल प्राइवेट मेम्बरकेर बिल - संसदमे!
जाहि लेल ५ दिसम्बर बेसी संख्यामे जुटबाक अनुरोध कैल जा रहल अछि तेकर भूमिका स्पष्ट करब जरुरी बुझाइछ।
सरकार द्वारा कानून बनेबाक लेल जे विधेयक बहस करबा लेल संसदमे राखल जाइछ तेकरा गवर्नमेन्ट बिल कहल जाइछ (वेस्टमिन्स्टर सिस्टम - जेकरा भारतीय संविधानसेहो अनुसरण करैछ) आ जे कैबिनेटसँ इतर सरकारक सहयोगी वा विरोधी पक्षक सदस्य द्वारा राखल जाइछ तेकरा प्राइवेट मेम्बर बिल मानल जाइछ। १९४७ केर तुरन्त बाद जखन मिथिला राज्यक माँग भारतीय संसदमे पास नहि भेल आ फेर राज्य गठन आयोग द्वारा सेहो १९५६ मे आरो-आरो नव राज्य गठन होयबा समय सेहो एकरा नकारल गेल तेकर बादसँ आधिकारिक बहस भारतीय संसदमे एहिपर नहि भेल अछि। ताहि लेल दरभंगासँ भाजपा संसद कीर्ति झा आजाद एहि विषयपर गंभीरतापूर्ण संज्ञान लैत बौद्धिकतासँ भरल ऐतिहासिकता आ उपलब्ध दस्तावेज सबकेँ समेटने अपना दिशिसँ मिथिलाक अस्मिताक रक्षा लेल डेग उठौलनि आ एहि क्रममे हुनका द्वारा प्रस्तुत बिल "बिहार झारखंड पुनर्संयोजन विधेयक २०१३" (The Bihar Jharkhand Reorganization Bill, 2013) संसदमे बहस लेल प्रस्तावित कैल गेल अछि। विधान अनुरूप कोनो बिलपर बहस लेल राष्ट्रपतिक मंजूरी आवश्यक रहनाय आ फेर समुचित तारीख दैत एहिपर बहस केनाय आ यदि सदन एकरा मंजूर करैत अछि तँ संविधानमे प्रविष्टि केनाय - यैह होइछ प्राइवेट मेम्बर बिल।
जेना ई बुझल अछि जे मिथिला राज्यक माँग भारतक स्वतंत्रता व ताहू सँ पूर्वहिसँ कैल जा रहल अछि - कारण बस एकटा जे "मिथिला अपना-आपमे परिपूर्ण इतिहास, भूगोल, संस्कृति, भाषा, साहित्य, संसाधन, समाजिकता आ सब आधारपर राज्य बनबाक लेल औचित्यपूर्ण अछि" आ भारतीय गणतंत्रमे राज्य बनबाक जे आधार छैक तेकरा पूरा करैत अछि.... दुर्भाग्यवश अंग्रेजक समयमे प्रान्त गठन करबा समय मिथिला लेल पूरा अध्ययनक बावजूद बस किछेक खयाली कल्पनासँ एकरा मिश्रितरूपमे 'बिहार' राज्य संग राखि देल गेल छल, मुदा बिहारसँ पहिले उडीसाक मुक्ति (१९३६) आ फेर झारखंडक मुक्ति (२०००) मे कैल गेल यद्यपि मिथिलाक माँग ताहू सबसँ पुरान रहितो एहिठामक लोकसंस्कृतिक संपन्नता आ लोकमानसक सहिष्णुताकेँ कमजोरी मानि बस सब दिन संग रहबाक लेल अनुशंसा कैल गेल... परञ्च जे विकास करबाक चाही से नहि कैल गेल, जे पोषण करबाक चाही सेहो नहि कैल गेल... उल्टा जेहो पूर्वाधार एहिठाम विकसित छल तेकरो धीरे-धीरे मटियामेट कय देल गेल। बिहारक शासनमे सब दिन मिथिला क्षेत्र उपेक्षित रहि गेल। एक तऽ प्रकृतिक प्रकोप जे बाढिक संग-संग सूखाक दंश, ऊपरसँ कोनो वैज्ञानिक वा विकसित प्रबंधन नहि कय बस दमन आ उपेक्षाक चाप थोपि मिथिलाक लोकमानसकेँ आन-आन राज्य जाय सस्ता मजदूरी आ चाकरीसँ जीवन-यापन करबाक लेल बाध्य कैल गेल। परिणामस्वरूप एहि ठामक विकसित आ सुसभ्य परंपरा सब सेहो ध्वस्त भेल, लोकसंस्कृतिक मृत्यु होमय लागल आ आब मिथिला मात्र रामायणक पन्नामे नहि रहि जाय से डर बौद्धिक स्तरपर स्पष्ट होमय लागल। तखन तऽ जे विधायक (जनप्रतिनिधि) एहिठामसँ चुनाइत छथि आ केन्द्र व राज्यमे जाइत छथि हुनकहि पर भार रहल जे मिथिलाकेँ कोना संरक्षित राखि सकता - लेकिन जाहि तरहक नीतिसँ मिथिलाकेँ विकास लेल सोचल गेल ताहिसँ उपेक्षा आ पिछडापण नित्यदिन बढिते गेल। हालत बेकाबू अछि, लोकपलायन चरमपर अछि, शिक्षा, उद्योग, कृषि, प्रशासन सब किछु चौपट देखाइत अछि। बिना राज्य बनने कोनो तरहक सुधारक गुंजाइश न्यून बुझाइछ।
हलाँकि भारतमे लगभग ३०० सँ ऊपर प्राइवेट मेम्बर बिल आइ धरि आयल, ताहिमे सँ बिना बहस केने कतेक रास गट्टरमे फेका गेल तऽ लगभग १४ टा विधानक रूपमे सेहो स्वीकृति पौलक। एहि बिलक भविष्य जे किछु होउ से फलदाता बुझैथ, लेकिन एक सशक्त-जागरुक चेतनशील मैथिलक ई कर्तब्य बुझापछ जे अपन राजनैतिक अधिकार लेल एना हाथ-पर-हाथ धेने नहि बैसैथ आ अपन अधिकार लेल आवाज धरि जरुर उठबैथ। यदि भारतीय गणतंत्रमे मिथिलाक मृत्यु तय छैक तऽ भारतक भविष्यनिर्माता सब जानैथ, लेकिन एक "मैथिल" लेल अपन भागक कर्तब्य निर्वाह करबाक जरुरत देखैत अपील कैल जा रहल अछि जे जरुर बेसी सऽ बेसी संख्यामे जन्तर-मन्तरपर ओहि बिलकेर समर्थन लेल राजनैतिक समर्थन जुटेबाक उद्देश्यसँ आ मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा राखल गेल धरनामे सद्भाव-सौहार्द्रसंग सहभागिता लेल सेहो हम सब पहुँची। अपन अधिकार लेल संघर्ष करहे टा पडैत छैक, बैसल कतहु सँ कोनो सम्मान वा स्वाभिमान प्राप्त नहि भऽ सकैत छैक, ई आत्मसात करैत हम सब एकजुटता प्रदर्शन करी।
याद रहय - ५ दिसम्बर, २०१३, स्थान जन्तर-मन्तर, समय दिनक १० बजेसँ।
रविवार, 1 दिसंबर 2013
गजल
करेजामे अपन हम की बसेने छी
अहाँकेँ नामटा लिख-लिख नुकेने छी
बितैए राति नहि कनिको कटैए दिन
पियाकेँ बाटमे पपनी सजेने छी
हमर ठोरक हँसीकेँ देख नै हँसियौ
अहाँ हँसि लिअ दरद तेँ हम दबेने छी
हमर जीवन अहाँ बिनु नै छलै जीवन
मनुक्खसँ देवता हमरा बनेने छी
गजलमे ई निशा आँखिक अहीँकेँ ‘मनु’
बुझू नै हम महग ताड़ी चढ़ेने छी
(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
गुरुवार, 21 नवंबर 2013
आब नै चुप रहव - चल्लू डेल्ही
एहन चमचा शिरोमणि के की कायल जाय ,
कालिख पोअति चुगला बनायल जाय ,
आऊ सब मिलि एकर पुतला दहन करी ,
मैथिल होयबाक किछु त स्वाभिमान करी ,
जा तक रहत एहन एहन लोक जेना की रावत ,
मैथिलि अपमानित होइत रहत ....... तावत
आऊ सब मिलि देखाऊ अपन त|गत |
आखिर राम की राजनीति चमकाने वाले और इलेक्शन के समय ८४ कोशी यात्रा करनेवालों की जड़ता कब टूटेगी ?
माता सीता का यह अपमान, कब तक सहेगा हिंदुस्तान ?
जब सीता माता थी तब इंडिया, भारत, हिंदुस्तान, या नेपाल ही नहीं बना था, उस समय तो मिथिला राज्य हुआ करता था, क्या सही में अज्ञानी नेताओ के संख्या जयादा होगया है इस देश में ?
सोमवार, 18 नवंबर 2013
साम- चकेबा पर्व - नोएडा
श्री महेश शर्मा (विधायक- नॉएडा ) नेपाल सन - प्रवीण नारायण चौधरी (अन्तर रास्ट्रीय दहेज़ मुक्त मिथिला ) मैथिला राजय निर्माण सेना- के सह सहयोगी राजेश झा जी , मिथिला वाशी सोसाइटी के महा सचिव - संजय झा , मदन ठाकुर दहेज़ मुक्त मिथिला (देल्ही -प्रभारी ) अनिल झा जी , खेला नन्द झा , जिनकर मुख्य उदेश छल , बिहार मिथिलांचल के बिकाश और मिथिलाक परम परा और धरोहर के सयम रखनए , अहि साम - चकेबा पर्व के संचलन श्री महेश शर्मा (विधायक- नॉएडा )के दुरा दीप प्रजुलित आ पात्रिका बिमोचन संग साम -चकेबा मूर्ति के अपन ठेहुन से तोरैत उपरांत मिथिलाक परम- परा के निर्वाह करैत , अपन मुखार -बिंदी से मिथिलाक अनेको धरोहर के बखान केलैथि , ओही के बात आमोद झा मुजिकल ग्रुप के जरिया , सांस्कृतिक कार्य- करम के सुरुवात के गेल जाही में मुख्य गायिका कुमकुम मिश्रा , कल्पना जी के संग अनेको गायक - गायिका सब उपस्थित भेल छला ,
( नोट - डेल्ही एन सी आर में ई प्रथम स्थल अच्छी जतय मिथिला के संस्कृति के गरीमा बढबैत अपन पहचान आ संस्कारक संग ई शुभ अबसर पर शिव शक्ति सोसैटी (सेक्टर ७१ नॉएडा ) दुवारI साम- चकेबा पर्व के आयोजन आए ६ वर्ष सन मनाबैत छैथि , अहि द्वारे कहल जैत अच्छी , जतय मैथिल ओतय मिथिला
जय मैथिल - जय मिथिला )
शुक्रवार, 15 नवंबर 2013
गजल
बुधवार, 23 अक्टूबर 2013
गजल
शनिवार, 19 अक्टूबर 2013
गजलक लहास
गुरुवार, 17 अक्टूबर 2013
गजल
कोना कहब हम घुरि गाम आबै लेल
गेलौं अहाँ दिल्ली धन कमाबै लेल
कहबै करेजक हम दर्द दुख ककरासँ
छी गप्प रखने बहुते सुनाबै लेल
ठोकर कपारक लागल जखन सबतरिसँ
नहि नोर आँखिक बचलै नुकाबै लेल
सदिखन अहाँ बैसल मोनमे बनि मीत
की दूर गेलौं हमरे कनाबै लेल
कोना क ‘मनु’ कहतै आब अप्पन दोष
घुरि आउ फेरसँ दुनियाँ बसाबै लेल
(बहरे सलीम, मात्राक्रम 2212-2221-2221)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मन’





