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रविवार, 9 अगस्त 2026

गजल

हाथमे हाथ लेने सगरो चलब हम

आब तोहर बिना पल भरि नहि जियब हम

 

हो सुखद की कतेको अन्हार जीबन

बनि क छाहैर तोहर संगहि रहब हम

 

दीप नेहक मिझेए नहि आब कखनो

बनि क बाती सिनेहे हरदम जरब हम

 

अछि हँसी ई सरस निश्छल बड्ड मोहक

नेह भरि-भरि करेजा तोहर गहब हम

 

छोड़ि दुनिया कतौ नहि ‘मनु’ आब जायब

आँखिकेँ तोर सोझाँ  एतहि मरब हम

 

(बहरे असम, मात्राक्रम : 2122-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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