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शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2024

गजल

नीक केहन आइ सगरो रीत भेलै

प्रेम जकरा  देलियै  तीत भेलै

 

जेब खाली साँझ हम बाजार गेलौं

जे कियो  बुझलकै भयभीत भेलै

 

बोल सोहेतै किए ककरो गरीबक

आब धनिकक गाइरो नव गीत भेलै

 

जन्म भरि गिरगिट जकाँ जे रंग बदलै

ओकरे सभके किए  जीत भेलै

 

भाइ भैयारीक मुँह चाटै कुकुर ‘मनु

लाख सोशल मीडिया पर मीत भेलै

 

(बहरे रमलमात्रा क्रम 2122-2122-2122)

जगदानन्द झा ‘मनु

 

शनिवार, 16 दिसंबर 2023

गजल

हँसि क’ तोरब मोन नहि हम सीखने छी

नहि  करेजामे सभक घर छेकने छी

 

हम तँ लूटेलौ जतय तन मन जनम भरि

हाथ हुनकर बहुत माहुर चीखने छी 

 

आश छल अपनो समयमे  रंग हेतै

दूर रंगक  ओहि टोलसँ एखने छी

 

कीनबाकेँ लेल शहरक वास दू धुर

चास गामक तीन बीघा बेचने छी

 

करु शिकाइत एहि दुनियाकेँ कते ‘मनु

लैत मीतक  जान  सगरो  देखने छी

(बहरे रमलमात्राक्रम 2122-2122-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु

रविवार, 26 नवंबर 2023

गजल

टोपीमे लगै  बुढ़ा  झक्कास छै
बुढ़िया बिन अछैते मरै  नै आस छै 
  
गामक आइ केहन असल रखबाड़ छै 
एको धुर बचल ओकरा नै चास छै
  
शिक्षा केर घरमें बिकाइ ज्ञान छै
आजुक राजनीतिक कतेक बिनास छै 
 
पूजै लेल  कन्या तकै सब लोक छै
बनबे लेल कनियाँ तकै अरदास छै
 
बाबू माय एने  बजट बिगड़ैत छै
साढ़ू सारि ‘मनु’ बैंक खासम खास छै
 
मात्राक्रम : 2221-2212-2212 सभ पाँतिमे। तेसर शेरकेँ दोसर पाँतिमे दूटा अलग अलग लघुकेँ दिर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु

 

बुधवार, 22 नवंबर 2023

रुबाइ

जे घाव अहाँ हमर करेजकेँ देलहुँ

सबटा ओ दर्द दुनियाँसँ नुका लेलहुँ  

मुस्कीसँ हमर नै बुझू जे हम खुश छी

खूनक घुट अहाँक खुशीमे पी गेलहुँ

              ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

 


मंगलवार, 21 नवंबर 2023

रुबाइ

 हे कृष्ण गोविंद मुरारी मिता हमर 

सगरो दुनिया केर मालिक पिता हमर

गेलअ छोरि किएक तू ‘मनु’क करेजा

घुरि आबअ नहि तँ सजत आब चिता हमर

                    ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


गुरुवार, 16 नवंबर 2023

रुबाइ

सिस्टम आइकेँ किए बबाल बनल अछि 

नेता सभ तँ  एकटा जपाल बनल अछि 

बड़ बड़ बागर बिल्ला राज चलबैए

जनताक प्राणेपर सबाल बनल अछि  

                 ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


मंगलवार, 14 नवंबर 2023

रुबाइ

मीरा केर हरने अहाँ कते दुख छी

खा साग विदुर केर भेल बड्ड सुख छी

हे माधव ‘मनु’ केर अपन भक्ति दय दिअ

दुनियामे सबसँ सुन्नर अहाँक मुख छी 

                  ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


गुरुवार, 26 अक्टूबर 2023

रुबाइ

पाथर करेजा हमर प्रभु कोमल करु

एतअ रहि अहाँ एहेन सिनेहल करु

संसारक जंजालसँ मुक्ति दय ‘मनु’केँ

अपने चाकरीमे  सदिखन राखल करु 

              ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

बुधवार, 25 अक्टूबर 2023

पोथी चर्चा, बीहनि कथा संग्रह - तोहर कतेक रंग


पोथीक नाम : तोहर कतेक रंग 
विधा : बीहनि कथा संग्रह 
भाषा : मैथिली 
बीहनिकार/ कथाकार / लेखक : जगदानन्द झा ‘मनु’
पोथी परिचय: बीहनि कथा संग्रह "तोहर कतेक रंक",  एहि ठाम तोहर माने स्त्री, नारी । स्त्रीक विभिन्न रूपक चित्रकें चित्रण करैत ई बीहनि कथा संग्रह बहुत रूचिगर अछि। एकसँ एक नीक नीक बीहनि सभ सम्पूर्ण पोथीकेँ एक्केँ संगे पढ़ै केर लेल मोनमे कोताहल व उत्सुकता जगेने रहैत अछि।  जगदानन्द झा ‘मनु’ पिछला डेढ़ दसकसँ मैथिलीमे लगातार बीहनि कथा लिखैत, मैथिली बीहनि कथा लेखनमे अपन नीक जगह बनोने छथि। 
मूल्य: 200 भा ₹ (संपूर्ण भारतमे डाक खर्च सहित, भारतसँ बाहर डाक खर्च अतिरिक्त)
पोथी प्राप्ति लेल: अपन पूर्ण पता, मोबाइल नम्बर, पिन कोड सहित +91 92124 61006 पर वाट्सअप करी

सोमवार, 23 अक्टूबर 2023

गजल

खड़ाम पैरमे नहि  अकास मोनमे छल

कुहास बहुत बाहर  इजोत टोनमे छल 

 

टएरकेँ चलाबी गरीब तेँ बुझू नहि 

हमर अपन सगर धन अहाँक लोनमे छल 

 

किएक आनके दुख  बुझत चलाक नेता

हुनक सगर बुढ़ापा तँ   सेफ जोनमे छल 

 

सिनेह शांति  सबटा जगतसँ  गेल हेरा

अखनसँ नीक बेसी मनुष्य बोनमे छल 

 

पतंग  पाछु  भागैत   मनुक  हर्ख देखू

पुतौह केर जेना  बहिनसँ  फोनमे छल 

(मात्राक्रम 121-2122-121-2122, सभ पाँतिमे)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

शनिवार, 12 अगस्त 2023

गजल

भहरल भीत नै उठाउ यौ पाहुन 
जर्जर टाट  नै सटाउ यौ पाहुन 
 
खाली छाड़बै  उछेहबै भरि दिन 
झहरल चार नै बचाउ यौ पाहुन 
 
पाकल काँच जेहने घरे भरिमे 
बाहर नाक नै कटाउ यौ पाहुन 
 
धधकै आगि खड़ खड़ेल पजरल छै
पाइन ढारि नै जराउ यौ पाहुन 


सगरो खाम   गेल सड़ि  हबेलीकेँ 
‘मनु’केँ हँसि क  नै बजाउ यौ पाहुन 


(मात्राक्रम 2221-212-1222, सभ पाँतिमे।)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


गुरुवार, 15 जून 2023

गजल

अहाँ सुनबै जँ नहि  हम केकरा कहबै

पिया जुलमी हमर दुख हम कते सहबै 

 

सखी बहिना  अहाँके प्रेममे छूटल 

पिया हम आब कोना असगरे रहबै

 

निहोड़ा आब करु हम कोन विधि सजना 

सगर उसरैग एही भक्त पर ढहबै

 

विरहके आगिमे जरि मरि रहल छी हम

अहाँ आइब करेजामे कखन गहबै

 

रहत नेहक वचन नै यादि ‘मनु’ जा दिन

जहर माहुर अछैते पानिमे बहबै 

(बहरे हजज, मात्रा क्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’