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गुरुवार, 5 जून 2025

बीहनि कथाक कथा कहानी संगे

हिन्दी साहित्यमे पहील कहानी किछु गोटे "रानी केतकी की कहानी" केर मानै छथि। कथा सैयद इंशाअल्लाह खान द्वारा 1803 या 1808 मे लिखल गेल छल कहानी मध्यकालीन भारतक प्रेमकथा अछि कथामे रानी केतकी राजकुमार वीरसेनक प्रेम कहानी कहल गेल अछि ओतए किछु गोटे किशोरी लालक इन्दुमती केर तँ आओर किछु गोटे माधवराव केरएक टोकरी मिट्टीकेर।  मुदा हिन्दी कहानीक असली विकास प्रेमचंदक कहानी हुनक समयसँ भेल

प्रेमचंदक जीवन काल - 1880 सँ 1936 छल, 1803 सँ पहिने कहानी शब्दक प्रयोग कियो नहि केलक। तँ की 1803 वा प्रेमचंद केर युगसँ पहिने कोनो कहानी नहि छल ? वेद, उपनिषद, पुराणमे हजारो कहानीक वर्णन अछि, मुदा ओकरा कथा कहल जाइत छल। जेना पंचतंत्रक कथा जे की 300 .पू. पहिने लिखल गेल छल।

वर्तमानक हिन्दी साहित्यमे कहानीक अर्थ अंग्रेज़ी केर Sort story सँ लेल जाइ छैक। मुदा हिन्दी साहित्यमे आइ-काल्हि हिन्दी साहित्यक कहानीसँ अलग, छोट छोट कहानी क़रीब तीन चारि सय शब्दमे खूब लिखल जा रहल अछि तेकर नामकरण हिन्दी साहित्यमे लघु कथा केर नामसँ भेल अछि। एहि लघु कथाकेँ ज्ञानी लोकनि सभ मैथिली केर बीहनि कथासँ तुलना करै लेल आतुर छथि। ज़खन कि मैथिलीमे बीहनि कथा लघु कथा दुनू स्वतंत्र रूपसँ लिखल जा रहल अछि।

आब मैथिली कथाक वर्गीकरण केर हम एना देख सकैत छी-

बीहनि कथा : कथ्य वा संवाद जेकर मुख्य अंग छैक, एक दृश्यमे संपूर्ण कथा होइ, शब्द सीमा अधिकतम एकसय तक करीब हुए तँ  उत्तम।

लघु कथा : संवाद संगे भुमिका अथवा बिना संवादों, एकसँ दूँ दृश्यमे संपन्न होबा चाही, शब्द सीमा क़रीब पाँच सय तक।

कथा : जकरा हिन्दी साहित्यमे कहानी कहल गेल छैक। मैथिली साहित्यमे कथा वा कथाक संग्रह केर खूब रचना भेल अछि।

दीर्घ कथा : अर्थात नमहर कथा। जाहि ठाम विस्तारसँ व्याख्या कय रचना केएल गेल हुए। एतेक नमहर जे चारि-पाँच टा कथासँ एकटा पोथीक निर्माण सकेए।

आब कने गप्प करै छी, बीहनि कथा केर मादे -

बीहनि कथा नव विधा होइतो, आइ कोनो तरहक परिचय लेल मोहताज नहि अछि।  मैथिलीमे नित्य नव-नव बीहनि कथा बीहनि कथाक पोथी लिखल जा रहल अछि। हम एकर इतिहास उत्पतिकेँ मादे एखन नहि कहब मुदा एतवा कहबामे कोनो हर्ज नहि जे बीहनि कथाक स्थापना विकास लेल मुन्नाजीक (मनोज कर्ण) भगरथि योगदानकें नहि बिसरल जा सकैत अछि। हमरो हुनके मार्गदर्शन सहयोगे बीहनि कथा लेखनमे उदय भेल। मुन्नी कामतजी, डॉ. आभा झाजी, सात्वना मिश्राजी, कल्पना झाजी, गजेन्द्र ठाकुरजी, घनश्याम घनेरोजी, विद्याचन्द झा 'बंमबंम' जी, डॉ. प्रमोद कुमारजी, ओमप्रकाश झाजी, डॉ. उमेश मण्डलजी, कपिलेश्वर राउतजी आदिक बीहनि कथा लेखनमे जतेक प्रशंसा कएल जे से कम। वर्तमान समयमे मैथिलीक बीहनि कथाकार सभ दुनियाँक बड़का-बड़का भाषाकेँ एहि दिस सोचै लेल बिबस कए देलखिन्ह। अंग्रेजीमे एकर  नामकरण अथवा भाषांतर सीड स्टोरीकहि भेल। हिंदी अंग्रेजीमे जकर कोनो स्थान नहि ओहेन एकटा नव विधाक अग्रज मैथिली साहित्य विधा थिक  “बीहनि कथा

किछु लोक बीहनि कथा लघु कथामे फराक नहि कय पबैत छथि मुदा दुनूमे बहुत फराक अछि। बीहनि अर्थात बीआ। तेनाहिते मोनक बिचारक बीआ जे कखनो कतौ फूटि सकैए, बीहनि कथा। विचारक एकटा एहेन बीहनि, बीआ, सीड जे लोकक करेजाकेँ स्पर्श करैत, मस्तिष्ककेँ सोचै लेल विवस दै।

बीहनि कथाक आवश्यकता समयक संग जरुरी अछि, जेना एक समयमे पाँच दिनक क्रिकेट मैचक प्रचलन छल ओकर बाद आएल वन डे क्रिकेट आजुक समयक माँग अछि ट्वेन्टी ट्वेन्टी। तेनाहिते एखुनका समय अछि बीहनि कथाक।          

बीहनि कथा कोना लिखबा चाही आओर एकरामे की-की गुण होइत छैक ? शंक्षेप्तमे कही तँ एक गोट श्रेष्ठ बीहनि कथामे निचाँ लिखल गुणँ होबाक चाही      

▪️सम्पूर्ण कथा मात्र एकटा दृश्यमे होबाक चाही। जेना नाटकक मंचन मंचपर होइत छैक ओहिमे कतेको बेसी दृश्य भऽ सकैत छैक मुदा बीहनि कथाक कथ्य कथा दुनू एके दृश्यमे सम्पन्न भए जेबा चाही।

▪️बीहनि कथाक मुख्य अंग संवाद अछि। जतेक सटीक नीक संबाद होएत ओतेक नीक। शव्द चयन एहेन हेबा चाही जे पाठककेँ अर्थ बुझैक लेल सोचय नहि परनि। तुरन्त जे हम कहै चाहै छी पाठकक मानस पटलपर जेए।

▪️कथाक गप्प पाठकक करेजाकेँ छूबि लनि पढ़ला बादो करेजामे दस्तक दैत रहनि ओकर परिणाम वा समाप्तिक फरिछौँटमे नहि परि कय पाठकपर छोरि दी।

▪️जँ कथा कोनो सार्थक उदेश्य वा गप्पकेँ प्रस्तुत करैमे सफल अछि, समाजकेँ कोनो नीक बेजए पक्षकेँ दखा रहल अछि तँ सर्वोतम।

▪️पढ़ैक कालमे पाठकक मोनमे मनोरजन संगे-संगे रूचि कौतुहल जगा सकेए। एना नहि बुझना पड़े जे कोनो प्रवचन सुनि रहल छी।

▪️जँ सम्भव हुए तँ इतिहास बनि गेल पात्र आ घटनासँ बचबाक चाही।

✍🏻 जगदानन्द झामनु


शनिवार, 31 मई 2025

गजल

बड़ सुनल जस  माइ हे तोहर दुअरिया

जोड़ि कल अनलौं  सिनेहक हम गठरिया

 

सूप डाला कोनिया सभमे अरज छै

थाढ़ दुखलै गोरबा   फेरूँ नजरिया

 

दुख दुखीयाकेँ हरै   परमेश्वरी तूँ

माइ हमरे बेरिया मुनलअ किबरिया

 

दिन छये देने छलौं शोभा अपन जे

फेर दर्शन दिअ अहाँ हम छी भिखरिया

 

मोन टूटल जाइए  छल देह टूटल

‘मनु’ तकै छै माइकेँ सगरो नगरिया

 

(बहरे रमल, मात्राक्रम 2122-2122-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

 


मंगलवार, 13 मई 2025

रुबाइ

जीवन मृत्युकेँ छोर तोहर हाथमे

कठपुतली इ जग डोर तोहर हाथमे

हम सरनागत एलौं तोहर सरनमे

सगरो कष्टक तोड़ तोहर हाथमे

             ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

रविवार, 11 मई 2025

रुबाइ


जिनका देलौं करेजा वेपारी

मोनसँ खलेलनि जनि हमर लाचारी

हम रहि सिधा साधा सज्जन बेचारी

पहुँचल फेरल बड़ पैघ खेलाड़ी

                  ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


शनिवार, 26 अप्रैल 2025

रुबाइ

हे कृष्ण फेर अवतार एकबेर लिअ 

पापी कुकरमी सभकेँ आबि घेर लिअ 

धरती अहाँक डूबि रहल अधर्ममे 

जतरा आबि एक बेर अपन फेर लिअ 

                ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


बुधवार, 26 मार्च 2025

पोथी चर्चा, कविता आ गीत संग्रह- व्यथा




पोथीक नाम : व्यथा

विधा : कविता गीत संग्रह 

भाषा : मैथिली 

कवि/ लेखक: जगदानन्द झामनु

पोथी परिचय:  ‘व्यथाशीर्षक कविता-संग्रह जगदनानन्द झामनुद्वारा रचित कुल 34 गोट कविता 16 टा गीतक संकलन थिक। अधिकांश कविता मिथिलाक गौरव-गाथासँ लए कए महिलाक दशा पर चित्रित अछि। एकर अतिरिक्त किछु कविता आन आन विषयपर कविक भावोद्गार व्यक्त करैत अछि। संगहि गीतमे कविक अर्चनाक स्वर मुखरित भेल अछि। मिथिलाक गुणगान एकर अतीत आओर वर्तमानक बीच विरोधाभास विषयपर पहिल 14 टा कविता सुन्दर सुमधुर स्वरमे सजाओल गेल अछि। बाँकीक आन कविता सभ सेहो पाठकक मनोरंजन आ अपन माटि पानिकेँ यादि आ महत्वतासँ चित्रित करैत करेजामे एकटा मधुर कम्पन करैत अछि। 

मूल्य: 290 भा ₹ (संपूर्ण भारतमे डाक खर्च सहित, भारतसँ बाहर डाक खर्च अतिरिक्त)

पोथी प्राप्ति लेल: अपन पूर्ण पता, मोबाइल नम्बर, पिन कोड सहित +91 92124 61006 प  वाट्सअप करी

 


मंगलवार, 11 फ़रवरी 2025

पोथी चर्चा, गजल संग्रह- नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर

 




पोथीक नाम : नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर 
विधा : गजल संग्रह (बहरयुक्त)
भाषा : मैथिली 
गजलकार/ गजलगोहि/ लेखक : जगदानन्द झा ‘मनु’
पोथी परिचय: एहि संग्रहक ई-बूक 2014 ईसवीसँ वेदेह आर्काइवमे उपलब्ध छल/अछि परंच प्रिंट रुपमे, प्रथम संस्करण 2022 व द्वितीय संस्करण 2023 मे आयल। अपन माटी पानिसँ दूर होबैक दर्दकेँ करेजामे समेटने, एक सय एकटा बहर युक्त गजलक संग्रह, पाठकक मनोरंजन संगे संग हुनक मोनमे अपन माटि पानिेक यादि आ सिनेहकेँ तरोताजा व ओतप्रोत करैमे सफल भेल अछि। जगदानन्द झा ‘मनु’ पिछला डेढ़ दसकसँ मैथिलीमे बहर युक्त गजल लिखैत, मैथिली गजलमे अपन एकटा नीक जगह बनोने छथि। यदि अपने गजल वा मैथिली गजलसँ सिनेह रखैत छी तँ अपनेकेँ ई पोथी अवश्य पढ़वा चाही। 
मूल्य: 200 भा ₹ (संपूर्ण भारतमे डाक खर्च सहित, भारतसँ बाहर डाक खर्च अतिरिक्त)
पोथी प्राप्ति लेल: अपन पूर्ण पता, मोबाइल नम्बर, पिन कोड सहित +91 92124 61006 पर वाट्सअप करी