मजधारमे छोड़ि असगर गेलहुँ किए
एतेक भारी परीक्षा लेलहुँ किए
आएब कहि घुरि अहाँ नै अयलहुँ पिया
मोनक विरहकेँ पजाइर देलहुँ किए
कनि-कनि बितैए अहाँ बिन सगरो उमरि
नयनासँ ओझल पिया यौ भेलहुँ किए
जीवन कटत आब असगर नै ई हमर
हमरासँ एना अहाँ तमसेलहुँ किए
ई प्राण बिनु देह लदने थकलहुँ बहुत
माहुर तँ हम ‘मनु’ बिना नै खेलहुँ किए
(बहरे सगीर, मात्राक्रम : 2212-2122-2212)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’