हुनक मुस्कीक जादू जान मारैए
नजरि खसिते हियामे बाण मारैए
चमक घोघेसँ रूपक पूर्णिमा लेने
सगर अँगना कते मुस्कान मारैए
उदासी मोनमे कखनो जँ पसरैए
अहीं लग आबि ई फुलपान मारैए
सँभाइर पैर धरतीपर कनी राखू
झनक पायलसँ ई सुर तान मारैए
‘मनु’क सगरो गजलमे बनि अहीं आखर
कते यौवन दमकि सोहान मारैए
(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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