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रविवार, 5 जुलाई 2026

गजल

हुनक मुस्कीक  जादू जान मारैए

नजरि खसिते हियामे बाण मारैए

 

चमक घोघेसँ रूपक पूर्णिमा लेने

सगर अँगना  कते मुस्कान मारैए

 

उदासी मोनमे  कखनो जँ पसरैए

अहीं लग आबि ई फुलपान मारैए

 

सँभाइर पैर  धरतीपर  कनी राखू

झनक पायलसँ ई सुर तान मारैए

 

‘मनु’क सगरो गजलमे बनि अहीं आखर

कते यौवन  दमकि सोहान मारैए

 

(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


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