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गुरुवार, 16 अक्टूबर 2014

गजल


एमरीक पूजा जोड़ पकरने छै
गाम गाम मैयाकेँ पसारने छै

एक दोसरामे होड़ छैक लागल
सभक बुद्धिकेँ के आबि जकरने छै

पाठ माइकसँ छकरैत आँखि मुनि सभ
अपन घरक माएकेँ तँ बिसरने छै

एक कोणमे छथि चूप मूर्त मैया
लोक नाच गाजा भाँग दकरने छै

'मनु' किछो जँ बाजल आँखि खोलि कनिको
लोक ओकरेपर गाल छकरने छै

(मात्राक्रम :२१-२१-२२/२१-२१-२२)
© जगदानन्द झा 'मनु'           

गजल

कुटीमे आइ साँवरिया आबि गेलै

करेजक तार सभ सोहर गाबि गेलै

 

पिया बुझिते हमर मोनक दर्द कनिको

कतेको दुख  अपन हँसिते दाबि गेलै

 

हुनक मुस्कीसँ सगरो दुनियाक सम्पति

हृदय सबटा हमर छनमे पाबि गेलै

 

बनेलहुँ हम अपन जे हुनका सजनमा

जिला भरि केर लोकक मुँह बाबि गेलै

 

बसल छल मोन मंदिरमे ‘मनु’ जिनक छबि

हुनक हियकेँ हमर विनती भाबि गेलै

 

(बहरे करीब, मात्राक्रम 1222-1222-2122)

👍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’



रविवार, 5 अक्टूबर 2014

अभागल जनता


कोनो मोल नहि सधारण मनुषक जिनगीक
कीड़ा मकोड़ा जेना समा जाइत अछि
अकाल कालके गालमे
बड़का बड़का कहाबे वाला जनसेवक
जनताके बुझैत अछि भेड़ बकड़ी
कटवा दैत अछि अपन कुर्सी खातिर
मृत्यु परल लाशपर सेहो होइत अछि राजनिती
खूब घोषणा होइत अछि क्षतिपूर्तिक हेतु
हर बेर बनैत अछि जाँच आयोग
मुदा परीणाम घासके तीन पात
लाशक मुआवजामे सेहो घूसखोरी
ताहुपर साहबक सिनाजोड़ी
के किछु कहतै ओकरा
ओकरे शाशन ओकरे प्रशाशन
जनसाधारण बहाएत नोर
मुदा "अभागल जनताक" नोरक नहि कोनो मोल !!!!!!!!!!!
               
        :गणेश कुमार झा "बावरा "
          गुवाहाटी