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बुधवार, 29 अप्रैल 2026

गजल

नहि सिनेहक मोल मिसियो बुझलक हमर

लोक हँसि हँसि कय करेजा तजलक हमर

 

डोर साँसक जेकरा देलौं हाथमे

नहि हिया ओहो तँ संपति तकलक हमर

 

करु भरोसा आब कोना ककरोसँ हम

प्रिय छल जे मोनकेँ बड़ खुनलक हमर

 

मीत छल मोनक सगर जे सुखमे बनल

बुझि घड़ी दुख केर ओ नहि सुनलक हमर

 

देत अनकर दोष नहि ‘मनु’ कनिको हिया

एहने बिधना कपारे लिखलक हमर

 

(बहरे जदीद, मात्राक्रम 2122-2122-2212) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


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