ई कमल सन नजरि जे लाजे झुकल अछि
प्राण लेलक हमर जे आँचर खसल अछि
देखलहुँ मोहिनी रूपक छवि जखन हम
भेल पहिनेसँ मनमे जेना बसल अछि
हम दुनू मिल जँ जीवनमे संग चलबै
प्रेम जग देखतै मनमे जे सजल अछि
सत कहै छी अहाँकेँ हम मानियो लिअ
बिन अहाँ सुन्न सगरो जीवन बनल अछि
मीत मोनक अहीँ हम्मर सात जन्मसँ
हाँ सजन केर सुनि ली तेँ ‘मनु’ बचल अछि
(बहरे असम, मात्राक्रम 2122-1222-2122)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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