हे कृष्ण फेर अवतार एकबेर लिअ
पापी कुकरमी सभकेँ आबि घेर लिअ
धरती इ अहाँक डूबि रहल अधर्ममे
जतरा आबि एक बेर अपन फेर लिअ
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
मैथिली साहित्य आ भाषा लेल समर्पित Maithiliputra - Dedicated to Maithili Literature & Language
हे कृष्ण फेर अवतार एकबेर लिअ
पापी कुकरमी सभकेँ आबि घेर लिअ
धरती इ अहाँक डूबि रहल अधर्ममे
जतरा आबि एक बेर अपन फेर लिअ
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
पोथीक नाम : व्यथा
विधा : कविता आ गीत संग्रह
भाषा : मैथिली
कवि/ लेखक: जगदानन्द झा ‘मनु’
पोथी परिचय: ‘व्यथा’ शीर्षक कविता-संग्रह जगदनानन्द झा ‘मनु’ द्वारा रचित कुल 34 गोट कविता आ 16 टा गीतक संकलन थिक। अधिकांश कविता मिथिलाक गौरव-गाथासँ लए कए महिलाक दशा पर चित्रित अछि। एकर अतिरिक्त किछु कविता आन आन विषयपर कविक भावोद्गार व्यक्त करैत अछि। संगहि गीतमे कविक अर्चनाक स्वर मुखरित भेल अछि। मिथिलाक गुणगान आ एकर अतीत आओर वर्तमानक बीच विरोधाभास विषयपर पहिल 14 टा कविता सुन्दर सुमधुर स्वरमे सजाओल गेल अछि। बाँकीक आन कविता सभ सेहो पाठकक मनोरंजन आ अपन माटि पानिकेँ यादि आ महत्वतासँ चित्रित करैत करेजामे एकटा मधुर कम्पन करैत अछि।
मूल्य: 290 भा ₹ (संपूर्ण भारतमे डाक खर्च सहित, भारतसँ बाहर डाक खर्च अतिरिक्त)
पोथी प्राप्ति लेल: अपन पूर्ण पता, मोबाइल नम्बर, पिन कोड सहित +91 92124 61006 पर वाट्सअप करी
१
सब होएत
भवसागर पार
कृष्ण नामसँ
२
कृपा सदति
बना कय राखब
हे भगवान
३
वृंदावनके
कन-कनमे कृष्ण
वास करैत
४
नंदगाममे
सबतरि देवता
गोपीभेषमे
५
निधिवनमे
गोपाल गोपी संग
रास रचैत
६
धर्मक संगे
सगरो छथि कृष्ण
कुरूक्षेत्रमे
७
नारीमे सारी
की सारीमे नारी छै
जानथि कृष्ण
८
मथुरा एलौं
कृष्णमय भेलहुँ
अहीँक कृपा
९
राखब कृपा
सबपर माधव
सुनूँ विनती
१०
बसि जाउ हे
हमर राधा रानी
मन मनमे
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
हाइकू मुलत: जापानी काव्य विधा छैक। हाइकूकेँ जन्म, पालनपोषण आ विकास जापानमे, जापानी संस्कृती आ जापानी माटि पानिमे सनि कय भेल छैक। सत्रहवीं शताब्दीक मध्यमे हाइकूकेँ एकटा स्वतंत्र काव्य विधाकेँ रुपमे स्थापित करैमे मात्सुओ बाशो केर सराहनीय काजकेँ सदति यादि राखल जाएत। हाइकू अपन लोक प्रियता आओर सहजता केर कारण जापानसँ निकलि आन-आन भाषा होइत आइ मैथिलीमे सेहो खूब लिखाएल जा रहल अछि।
हाइकू एकटा वार्णिक छंद रचना छैक, जे कुल तिन पाँतिमे लिखल जाइ छै। एकर वार्णिक संरचना छैक पाँच-सात-पाँच, अर्थात एकर पहिल आ तेसर पाँतिमें पाँच-पाँच टा आखर (अक्षर) आ दोसर पाँतिमे सातटा आखर होइत छै। हाइकूमे तुकबंदी वा कोनो विशेष छंदक पालन नहि होइत छैक। आ नहि विराम चिन्हक प्रयोग कएल जाइत छैक। हाइकू लिखैक लेल शब्द चयनमे विशेष ध्यान देबाक चाही। पूर्वमे हाइकू केर मुख्य विषय प्रकृति आ मौसम रहलै मुदा आब एहेन गप नहि रहि गेलैए, आब मानव प्रवृति, ईश्वर महिमा सहित आन आन विषय क्षेत्रमे एकर निरन्तर विस्तार भय रहल छैक।
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
अनलौं करेजा हमर ई स्वीकार करु
हमरासँ एना अहाँ नै बेपार करु
गरदनि उठा कनिक हमरा नै देखबै
हम आब एतेक कोना सिंगार करु
सस्ता महग बाढ़ि रौदी सगरो भरल
सोइच गरीबक अहाँ किछु सरकार करु
हरलौं कते युगसँ तन मन धन बनि अपन
नै आब ऐ आतमा पर अधिकार करु
झूठक बटोरल अहाँकेँ बहुमत रहल
‘मनु’ नै सड़ल बाँटि जनता बेमार करु
(बहरे सगीर, मात्राक्रम - 2212-2122-2212)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
प्रेममे हुनकर जहर चिखने जाइ छी
सब बुझैए हम निशा कयने जाइ छी
मानतै के देख मुँह पर मुस्की हमर
की करेजाकेँ अहाँ खुनने जाइ छी
जे मयूरक पाँखि पेलौं उपहारमे
प्राण बुझि संगे सगर धयने जाइ छी
रोशनाई नै कलममे बड़ अछि कहक
चीर छाती सोणितसँ लिखने जाइ छी
जीवनक ठोकर कते लागल चारुदिश
‘मनु’ सुमरि सब चोट ई सहने जाइ छी
(बहरे जदीद, मात्राक्रम 2122-2122-2212)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’