करिया मेघ
धऽ कोण पुवरिया
डेरा रहल ।
बिज्लोका लोकै
ठनका ठनकल
साहौर गाछ ।
हुनका लेल
की चिंता जिनकर
कोठाक घर ।
जकरा छैक
सड़ल एकचारी
धुक-धुक्की छै ।
नंगटे नाचै
सभ नेना भुटका
अलगे मस्ती ।
*पंकज चौधरी (नवलश्री) *
< ०६.०७.२०१२ >
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