जखन मोन कानल गजल कहलौं
रहल कोंढ़ छानल गजल कहलौं
जमाना सुतल छल जखन नींदसँ
तहन राति जानल गजल कहलौं
गरीबक घरक जेठ बेटा हम
अभाबे इ गानल गजल कहलौं
जुआ छल लदल कांहपर लोकक
पसीनासँ सानल गजल कहलौं
उमर ‘मनु’ बितल आर की करबै
अपन मोन ठानल गजल कहलौं
(मात्राक्रम 122-122-1222, सभ पाँतिमे)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें