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गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

गजल

पहड़ राति  बीत गेल नहि निन्द आबैए हमरा 

बितल छन अहाँक संग रहि-रहि सताबैए हमरा 

 

हृदय मोहनी अहाँक छवि आँखिमे जे रखने छी

ल कय आब ई तँ जान मानत बुझाबैए हमरा

 

इशारासँ राति दिन हियामे बजाबै छी छन छन

मुनल आँखि कोन बीध खोलब रिझाबैए हमरा

 

अहाँ हँसि अतेक जुनि खसाबू बिजुड़िया ई दाँतक

सहब आब अस्मभव भितर धरि हराबैए हमरा 

 

मधुर भेट केर आब अवसर कखन कोना होयत

विचारेसँ बड्ड ‘मनु’ करेजा जुड़ाबैए हमरा

 

(मात्राक्रम- 12-21-21-2122-1222-22, सभ पाँतिमे)

 ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

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