ओ उपर हम निच्चा रही
ओकर स्पर्शक बात की कही
केलक देहकेँ थौआ थौआ
के सखि साजन ?
ने सखि बौआ ।
मैथिली साहित्य आ भाषा लेल समर्पित Maithiliputra - Dedicated to Maithili Literature & Language
सोमवार, 8 फ़रवरी 2016
कहमुकरी-1
कृष्ण कन्हैया
Bal kavita_231
कृष्ण कन्हैया
कृष्ण कन्हैया रास रचैया
माखन-मिश्री लाउ कने
खेल करै लए गोपी संगे
हमरो आंगन आउ कने
मारि गुलेंती फोरब मटकी
टोली अपन बनाउ कने
गाय चरेबै भोरे-साँझे
वंशी फेर बजाउ कने
ता थइ ता थइ नाच करब
ग्वाल-बाल संग आउ कने
पोखरिमे जा खूब नहाएब
छुट्टी सरसँ दिआउ कने
शुक्रवार, 22 जनवरी 2016
गजल
ख़ून देहक सगर भेलै हमर पनियाँ
नै कतौ केर विश्वामित्र छी हमहूँ
प्राण लेलक हइर ई तोर चौवनियाँ
जरि क' तोहर पजारल आगिमे दुनियाँ
माय बापक नजरिमे भेल छै बनियाँ
नीक बहुते गजल कहने छलहुँ हमहूँ
आइ सभ किछु बिसरि बेचैत छी धनियाँ
झाँपि राखू अपन रूपक महलकेँ 'मनु'
भेल पागल कतेको देखि यौवनियाँ
(बहरे मुशाकिल, मात्रा क्रम; 2122-1222-1222)
जगदानन्द झा 'मनु'
शनिवार, 21 फ़रवरी 2015
हिंदी दिवस : हर हिंदुस्तानी के आवाज हिंदी..
मुदा बदलैत परिवेश मे जतय आय लोग के लेल वक्त नय अछि ओतय आय लोग सव भाषा के खिचड़ी कऽ देलक अछि। अंहा अपन आस-पासक लोगक बात पर गौर करव तऽ अंहा पैव जे आय शायदे ही कुनो एहन पुरूष औऱ महिला हैत जे कि शुद्ध भाषा के प्रयोग करैत होयत..जेना कि हिंदी बाजैत समय अंग्रेजी के प्रयोग, मैथिलि बाजैत हिंदी आ इंग्लिश शब्दक प्रयोग।
आय तऽ लोग महिलाओं सँ बात करैत कहैत अछि. आप खा रहे हो..या फेर बड़े सँ बात करैत समयो तू-तड़ाके क प्रयोग करैत अछि जेना कि तू खा ले, आप निकलो वगैरह..वगैरह।
दोसर अहम बात जे आय-काइल हर जगह अछि ओ अछि अंग्रेजी के बोलबाला। भौतिकतावादी युग मे स्टेटस मेंटेन करय के चक्कर मे हम विदेशी भाषा के तऽ तेजी सँ अपना रहल छि कियाकि इ बेहद जरूरी अछि, मुदा अपन पहचान ऑउर अपन मातृभाषा के बिसरैत जा रहल छि।
आय अगर मिथिलांचल दंपति दिल्ली, पुणे ऑउर बैंगलोर मे रहैत अछि तऽ हुनका बच्चा के मैथिलि नय आवैत अछि कियाकि ओ अपन बच्चा के कखनो मैथिलि बाजनय सिखेवे नय केलक, अगर बच्चा कखनो काल नकल करैतो अछि तऽ डांट-फटकार परैत अछि कियाकि हुनका लागैत यऽ जे कि हमर बच्चा मातृभाषा सीखे कs की करत ओकरा अंग्रेजी एवा चाहि कियाकि इहे सँ ओ स्मार्ट कहलैत जहनकि अपन क्षेत्रीय भाषा बाइज के पिछडल लागत।
इ सवटा लोगक ग्रसित मानसिकता कऽ सबूत अछि जेकर कारणे आय हमार क्षेत्रीय भाषा के ओ बढ़ावा नय मिलैत अछ जे कि अंग्रेजी कs मिल रहल अछ। हम देशक आन-बान ऑउर शानक बरकरार राखय के लेल कसम तऽ खाइत छि मुदा की मातृभाषा के अनदेखा कऽ के हम वाकई मऽ अपन सप्पत निभा रहल छि।
बुधवार, 18 फ़रवरी 2015
हम कवि नै छी
वस ! हमरा भीतर किछु आक्रोश अछि
जे समय-समयपर
लाबा बनि फूटि परैत अछि
जँ हम कवि
तँ हमरा एहेन असंख्य आक्रोशी
पटकैत अछि
अपन-अपन आक्रोशकेँ
पाथरपर अपन-अपन हथौरी नेने
जेठक रौदमे पिआसे
माघक बरसाती जाड़मे भूखे
मुदा ओकर कविताकेँ
के सुनैत अछि
सब बौक बहीर बनल
अपन-अपन टेढ़ आँखिसँ देखैत
मनक कोनो कोणमे
हथौरी आ पाथरक
चोटक वेदनाकेँ नुकोने
चलि जाइत अछि
कतौ केकरो कोनो कविक करेजक
आँखिक दुनू कोणा गिल भऽ जाइत अछि
तैयो कविता के सुनैत अछि
नै पाथरक
नै हथोरीक
आ नै भूख पिआससँ विकल पेटक।
©जगदानन्द झा 'मनु'
रविवार, 8 फ़रवरी 2015
गजल
मेहनतसँ बसायब अपन संसारकेँ
आजुक नवयुवक हम डरब धमकीसँ नै
छोरब नै अपन कनिको तँ अधिकारकेँ
बुझि अप्पन कियो छनमे करेजा ल' लिअ
टेढ़ीमे जँ छी नै सहब सरकारकेँ
धरतीपर जते बासन पकल काँच छै
एक्के हाथ सगरो गढ़ल कुम्हारकेँ
सहलों चोट सय भरि जन्म सोनारकेँ
'मनु' के सहत एक्को चोट लोहारकेँ
(बहरे कबीर, मात्रा क्रम; २२२१-२२२१-२२१२)
जगदानन्द झा 'मनु'
मंगलवार, 27 जनवरी 2015
बाल गजल
शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014
श्रद्धांजलि ( स्वर्गीय श्री शैलेन्द्र मिश्र भाइके )
२१ दिसम्बर २०१४
१६ दिसम्बर २०१४ के शैलेन्द्र मिश्र बिमारी सं ग्रषित के कारन मात्र - ५२ वर्ष के अवस्था में स्वर्गवशी भगेलहा , हुनक श्रद्धांजलि देबाक लेल मिथिला कला मंच आ सुगति - सोपान के सानिंध्य में श्री मति - कुमकुम झा और A -वन फिल्ल्म इंडिस्ट्री के संचालक सुनील झा पवन के अगुवाई में विभिन् प्रकार के डेल्ही एन सी आर में जतेक भी संस्था अच्छी हुनका सब के समक्ष शैलेन्द्र मिश्रा नामक बल्ड बैंक के योजना बनबै के मार्गसं अविगत केला । जे गति शैलेद्र भाई , हेमकान्त झा , अंशुमाला झा के संग भेल । ओहि विपप्ति सं दोसर किनको नै गुजरै परैं । कियाक नै हम सब मिल एकटा एहन काज करी जाहिसं मैथिलि कला मंच के हित में राखी हुनका लेल किछु राशि निवित राखल जय और ओहि राशि के शैलेन्द्र भाई एहन लोक लेल जरुरत परला पर मैथिल कला मंच काम आबैथि ।
एवं प्रकारे सेकड़ो के संख्या में आवि भाई शैलेन्द्र के श्रद्धांजलि दय प्रणाम करैत हुनक आत्मा के शांति प्रदान होयक लेल गयत्री मन्त्र के उच्चारण करैत २ मिनट के मोन धारण कइल गेल ।
शैलेन्द्र भाई के गुजरालसं खास के कला और साहित्य दुनू में बहुत नुकसान अच्छी । कही नै सकैत छी कतेको शैलेन्द्र भाई के चेला रंग कर्मी कला मंच सं पाछू छुटी गेला । मिथिला मैथिलि के प्रति हुनक एकटा बस अवाज बानी रही गेल --
हे मिथिला अहाँ मरैय सन पहिने हम मरीय जय
गुरुवार, 25 दिसंबर 2014
मिथिला महोत्सव - २०१४
गजल
गालपर तिलबा कते शान मारैए
निकलु नै बाहर सभक जान मारैए
देखलौं जतए अहीँपर सभक फोकस
सभ तरे तर नजरिकेँ बाण मारैए
तिर्थमे पंडित तँ मुल्ला मदीनामे
सभ अहीँकेँ राति दिन तान मारैए
आइ सुन्नरि मोहमे बूढ़ नव डूबल
देखिते मुँह फारि मुस्कान मारैए
काज कोनो नै बनेए जँ जीवनमे
‘मनु’ अहीँ लग फूल आ पान मारैए
(बहरे कलीब, मात्राक्रम 2122- 2122-1222)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
रविवार, 21 दिसंबर 2014
भक्ति गजल
शनिवार, 20 दिसंबर 2014
मैयाक गीत
शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014
गजल
जे देशकेँ अपमान करै
ओकर करेजक तीर बनी
सबहक सिनेहक मीत रही
ककरो मनक नै पीर बनी
आबी समाजक काज सदति
धरतीक नै हम भीर बनी
किछु काज ‘मनु’ एहन तँ करी
मरियो कऽ आँखिक नीर बनी
© जगदानन्द झा 'मनु'
सोमवार, 1 दिसंबर 2014
गजल
अहाँ बिनु नै सुतै नै जागैत छी हम
कही की राति कोना काटैत छी हम
सिनेहक मोल नै बुझलहुँ संग रहितो
परोक्षमे कते छुपि कानैत छी हम
करेजा केर भीतर छबि दाबि रखने
अहीँकेँ प्राण अप्पन मानैत छी हम
बुझू नै हम खिलाड़ी एतेक कचिया
अहाँ जीती सखी तेँ हारैत छी हम
अहाँ जतए कतौ जगमे खुश रही ‘मनु’
इहे वरदान सदिखन माँगैत छी हम
(बहरे करीब, मात्राक्रम 1222-1222-2122)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
शुक्रवार, 14 नवंबर 2014
गजल
बेथा करेजक लहकि गेलै, सभक झरकल मान छै
बैसल रहै छी प्रभुक दरबारमे न्यायक आसमे
हम बूझलौं नै बात, भगवान ऐ नगरक आन छै
सदिखन रहैए मगन अपने बुनल ऐ संसारमे
चमकैत मोनक गगनमे जे विचारक ई चान छै
आसक दुआरिक माटि कोडैत रहलौं आठो पहर
सुनगैत मोनक साज पर नेहमे गुंजित गान छै
सूखल मुँहक खेती सगर की कहू धरती मौन छै
मुस्की सभक ठोरक रहै यैह "ओम"क अभिमान छै
- ओम प्रकाश
दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ, दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ, दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ, दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ,
मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन-फाइलातुन-मुस्तफइलुन (प्रत्येक पाँतिमे एक बेर)



