ठठड़ी बना कयलनि ओ तँ सराध हमर
जिनकासँ छल मोनक नेह अगाध हमर
मुनि आँखि कयलहुँ विश्वास हियासँ जकर
ओ आबि कयलनि संसार विषाध हमर
ओ भोंकलनि मौका देखि पिजेल छुरी
कहियो छली जे तन-मनसँ अराध हमर
किछु छोड़लनि नहि जीबाक भरोस कनी
संगे घड़ारी लिख लेलनि बाध हमर
अपने जकाँ बुझलहुँ नीक करेज सभक
‘मनु’ बस इहे जीबनमे अपराध हमर
(मात्राक्रम 2212-2221-121 12 सभ पाँतिमे)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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