हम अहाँकेँ देखिते सुधि बिसरि गेलौं
लेसने बिन आगि सौंसे पजरि गेलौं
प्राण लेलक आँखि मिलनाइ हरजाइसँ
खा कऽ मोने मोन मुँगबा पसरि गेलौं
अछि जकर मुस्की इजोते सगर चकमक
मोरिते मुँह पानि बिन हम पिछरि गेलौं
स्वर्ग भेटल ओ अहाँ बिन नरक भेलै
छोरि सुख बैकुंठकेँ झट ससरि गेलौं
देख निरमल नेह हुनकर हृदय गदगद
बुझि सफल ‘मनु’ भेल सपना झहरि गेलौं
(बहरे कलीब, मात्राक्रम 2122-2122-1222)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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